दफ़नाना था सग़ीर को दफ़ना दिया रामकृष्ण को, चार महीने बाद घर लौटे अब्बा तो सामने आई सच्चाई

दफ़नाना था सग़ीर को दफ़ना दिया रामकृष्ण को,  चार महीने बाद घर लौटे अब्बा तो सामने आई सच्चाई

बांका(BANKA): बिहार के बांका से एक ऐसा अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसे सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे, और पुलिस अपना सिर पकड़ लेगी. दरअसल, बिहार के बांका के धोरैया थाना क्षेत्र के मुजाहिद अंसारी ने एक अज्ञात शव को अपना 'चार महीने से लापता अब्बा यानि पिता 'समझकर पूरे रीति-रिवाज के साथ कब्रिस्तान में दफन कर दिया. लेकिन ट्विस्ट तब आया, जब अगले ही दिन असली अब्बा (सगीर अंसारी) एकदम चंगे भले होकर घर वापस लौट आए! अब्बा को सामने देख परिजनों के होश उड़ गए कि 'फिर कब्र में कौन है?'

बांका धोरैया थाना क्षेत्र में अज्ञात मृतक के शव की पहचान में पुलिस की बड़ी चूक का मामला सामने आया है जिससे दूसरे के पिता के शव को अपने पिता सगीर अंसारी के शव समझकर कब्रगाह में दफना दिया और बाद में पिता के जिंदा लौटने के बाद पुलिस और परिजन दोनों की परेशानी बढ़ गयी. वहीं जिस शव को दफनाया गया था वो असल में रामकिशन मोहली का शव था जिसके दावेदार सामने आकर शव सौंपने की मांग धोरैया पुलिस से करने लगा.

बता दें, घटना धोरैया थाना क्षेत्र के भगवानपुर और भागलपुर जिले के सन्हौला गोविंदपुर से जुड़ा हुआ है. बाद में पुलिस और दोनों परिजनों की सूझबूझ से शव को कब्रगाह से बाहर निकालकर रामकिसन के परिजनों को सौंपा और सगीर के परिजनों ने गलतफहमी में चार माह से लापता पिता का ही शव समझकर दफन करने की भूल बताया.

बता दें, धोरैया थाना क्षेत्र के भगवानपुर का सगीर अहमद मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति होने के चलते चार माह से लापता था जिसकी खोजबीन परिजन कर रहे थे इसी बीच दो दिन पूर्व रजौन थाना क्षेत्र के पुनसिया में एक अज्ञात वृद्ध का शव बरामद होने के बाद रजौन पुलिस पोस्टमॉर्टम के बाद शव की पहचान को लेकर जिले भर और आसपास के थाने से शव की पहचान करने के प्रयास करने लगी. इसी दौरान धोरैया के भगवानपुर के लापता सगीर अंसारी का परिजन सामने आकर अपने पिता का शव होने का दावा किया जिसके बाद पुलिस ने शव उनको सौंप दी और धोरैया के कुर्मा कब्रिस्तान में रीति रिवाज के साथ दफन भी कर दिया गया.

दूसरे दिन अज्ञात शव के वायरल फोटो की पहचान भागलपुर के गोविंदपुर के रामकिसन मोहली के शव के रूप में करते हए उसके परिजन बीते बुधवार धोरैया थाना पहुँचकर शव सौंपने की मांग करने लगे. वहीं इसी बीच धोरैया के भगवानपुर के परिजन भी जो अपने पिता का शव समझकर कब्र में दफन किया था उसके पिता भी चार माह बाद घर लौट आया, अब परिजन चौक गए, फिर धोरैया पुलिस को अपने पिता को लौटने की जनकारी दी. बाद में धोरैया पुलिस सूझबूझ का परिचय देते हुए दोनों परिजनों से बातचीत करते हुए शव को कब्रगाह से निकालकर रामकिसन के परिजन को सौंपा गया.

फिलहाल घटना को लेकर दोनों परिजनों संतुष्ट दिखे और गलतफहमी में ऐसे काम होने की बात कही. बुधवार को ऐसी घटना के गवाह सैकड़ो लोग बने रहे और पुलिस प्रशासन और परिजनों के आपसी एकता से सारे मामले का शांतिपूर्ण निपटारा हो पाया. फिलहाल पुलिस मामले पर कुछ भी बोलने से बचती दिख रही है.