धनबाद (DHANBAD) - कोयलांचल के लोग बिजली संकट झेल रहे हैं और झारखंड बिजली वितरण निगम और डीवीसी बकाया-बकाया का खेल खेल रहा है. हालत यह है कि 8 से 10 घंटे बिजली कटौती हो रही है और यह लगातार 26 दिनों से हो रही है. फिर भी व्यवस्था चलाने वालों के कान पर जूं नहीं रेंग रहा है.


कोयला धनबाद का और बिजली दूसरों को
 डीवीसी धनबाद के कोयले का उपयोग कर रहा है और दूसरे राज्यों को बिजली बेच रहा है फिर भी हम चुप हैं. हमारे जनप्रतिनिधि चुप हैं. इसके लिए कहीं कोई सुगबुगाहट नहीं है. सवाल सिर्फ डीवीसी से बिजली कटौती की ही नहीं है, बिजली वितरण निगम मेंटेनेंस के नाम पर भी बिजली काट रहा है. उद्योग धंधे, कारोबार सब प्रभावित हैं.  


10 घंटे से अधिक पावर कट
नाराज धनबाद जिला चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष चेतन गोयनका ने कहा है कि- 'बिजली नहीं तो बिल का भुगतान नहीं 'गोयनका का कहना है कि एक तरफ सरकार जीरो कट बिजली देने की बात करती है तो दूसरी तरफ प्रतिदिन 10 घंटे से अधिक बिजली की आपूर्ति नहीं की जाती है. जिस समय कारोबार का समय होता है ,उसी समय बिजली काट दी जाती है. ऐसी हालत में जनरेटर के भरोसे कारोबार करना मुश्किल हो रहा है. उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जितनी दुकानदारी से कमाई होती है, उतना जनरेटर के खर्च में चला जाता है तो कारोबारी बिजली का बिल कहां से देंगे.


आमदनी नहीं तो बिल कैसा
उन्होंने बिजली विभाग को स्पष्ट चेतावनी दी है कि पहले विभाग बिजली नियमित करें. उसके बाद ही बिल  लेने की सोचे. उनका यह भी कहना है कि थोड़ा बहुत भी उपभोक्ताओं के पास बकाया रहने पर कनेक्शन काट दिया जाता है लेकिन विभाग अगर बिजली नहीं देता है तो उस पर आखिर उपभोक्ता अपने अधिकार का उपयोग कैसे करें. इसके लिए भी सरकार के स्तर पर जानकारी पुस्तिका जारी होनी चाहिए.

रिपोर्ट : सत्याभूषण सिंह, धनबाद