धनबाद (DHANBAD) : राज्यपाल रमेश बैस ने CSIR -CIMFR सभागार में कहा कि पहले मंत्र का जमाना था, आज यंत्र का जमाना है. हमारे अविष्कार को पेटेंट  बहुत मुश्किल से मिल पाता है. पोटाश 100 प्रतिशत आयात होता है. उसका रॉ मेटेरियल हमारे पास है.  बस उसका सही से टेक्नोलॉजी के साथ इस्तेमाल करने की कोशिश करनी होगी. हमें हर हाल में स्वदेशी अपनाना होगा.

सिम्फ़र में हो रहे है बेहतर रिसर्च

राज्यपाल ने कहा कि सिम्फ़र बेहतर रिसर्च कर रहा है. एक समय नालंदा विश्वविद्यालय में विश्व से लोग यहां पढ़ने आते थे. आज हम अपने बेटे के विदेश में पढ़ने पर गर्व करते हैं.अपने देश के प्रति भावना जागृत करने की आवश्यकता है. पानी से हाइड्रोजन बन जाये तो हम कई मामलों में आत्मनिर्भर बन सकते हैं. हमें देश प्रेम की भावना के साथ आगे बढ़ना होगा. अंग्रेजी में बोलने वाला बुद्धिमान समझा जा रहा है, हिंदी बोलने वाला बेवकूफ. लेकिन अभी तो हिंग्लिस का प्रचलन हो गया है. हमें अपनी मातृभाषा के साथ काम करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए.

180 साल का कोयला तो है लेकिन

देश को पृथ्वी, त्रिशूल व धनुष जैसे मिसाइल बनाने वाले  डीआरडीओ के सेवानिवृत्त निदेशक सह नीति आयोग के सदस्य डॉ. विजय कुमार सारस्वत ने अपने ओजस्वी भाषण में कहा कि देशी  तकनीक अपना कर हमें आगे बढ़ना होगा. अभी हमारे पास 180 साल तक के लिए कोयले का भंडार है. कोयले से उत्सर्जित कार्बन को कम कर कैसे इसका उपयोग करें ,इस पर विचार होना चाहिए. हाइड्रो कार्बन या फिर वैकल्पिक ऊर्जा इसके विकल्प हो सकते हैं.  संस्थान देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका रही है,आगे भी बहुत कुछ करने की जरुरत है.

संस्थान  का देश के विकास  में बड़ा योगदान

धनबाद के सांसद पीएन सिंह ने कहा कि 75 सालो में संसथान ने देश के विकास  में बड़ा योगदान किया है. एक समय था कि  देश में रिसर्च स्कॉलर नहीं आ रहे थे लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतिओ का परिणाम है कि  आज देश के लोगो की रूचि बड़ी है और विदेशो से भी लोग आ रहे है.
प्रति वर्ष 1000 करोड़ की मिलाने लगी है रॉयल्टी

दुनिया के श्रेष्ठ वैज्ञानिकों में शामिल हैं पीके सिंह 

संस्थान के निदेशक डॉ पी के सिंह ने कहा कि देश की जरुरत के मुताबिक हम काम कर रहे है.चाहे सेना के लिए सड़क बनानी हो या अंडरग्राउंड खदान ,हम जरूरतों को पूरा करने की लगातार कोशिश  कर रहे है और आगे भी करते रहेंगे.नतीजा है कि आज संस्थान को प्रति साल1000 करोड़ रूपए के रॉयल्टी मिल रही है.इसमें से 300 करोड़ केंद्र सरकार को देकर देश के विकास में भी हाथ बटा रहे है.बता दें  कि देश का ये वहीँ प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थान है जिसके पांच वैज्ञानिकों को दुनिया के 2 फ़ीसदी श्रेष्ठ वैज्ञानिकों में शामिल किया गया है.जिसमे इस संस्थान के निदेशक डॉ पीके सिंह भी शामिल है.


रिपोर्ट : अभिषेक कुमार,ब्यूरो हेड (धनबाद )