₹40 की जगह ₹200 टोल टैक्स की वसूली! पढ़िए इस गोरखधंधे की क्या है कहानी

    ₹40 की जगह ₹200 टोल टैक्स की वसूली!  पढ़िए इस गोरखधंधे की क्या है कहानी

    दुमका (DUMKA) झारखंड की उपराजधानी है दुमका और दुमका के जरमुंडी थाना क्षेत्र में सड़कों  पर अवैध वसूली का खेल महीनों से बदस्तूर जारी है. दरअसल जरमुंडी प्रखंड में विश्व प्रसिद्ध बाबा बासुकीनाथ मंदिर होने के कारण बासुकीनाथ नगर पंचायत बनाया गया ताकि क्षेत्र का सर्वांगीण विकास हो सके और यहां आने वाले श्रद्धालु सुखद अनुभूति के साथ वापस हो सके. नगर पंचायत का दर्जा मिलते ही प्रत्येक वर्ष टोल टैक्स वसूली के लिए टेंडर होने लगा ताकि नगर पंचायत को राजस्व की प्राप्ति हो और उससे नगर पंचायत में विकास का कार्य हो सके.

    एक करोड़ की पूंजी पर करोड़ों रुपए की वसूली

    प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी टोल टैक्स वसूली के लिए टेंडर हुआ. एक करोड़ रुपए से अधिक की बोली लगाकर अनूप मंडल ने टेंडर अपने नाम करवाया. नगर पंचायत को एक करोड़ से ज्यादा राजस्व की प्राप्ति हुई, लेकिन एक करोड़ रुपए की पूंजी लगाकर अभिकर्ता द्वारा करोड़ों रुपए की वसूली के लिए गोरखधंधा का खेल शुरू कर दिया गया. नियम के अनुरूप नगर पंचायत क्षेत्र में पार्क होने वाले वाहनों से ही रुपए लेना है, लेकिन नियमों की अनदेखी कर नगर पंचायत क्षेत्र से गुजरने वाले हर छोटे-बड़े वाहनों से रुपए की वसूली की जाने लगी. बात यहीं समाप्त नहीं हुई, अभिकर्ता द्वारा नगर पंचायत क्षेत्र से बाहर बैरियर लगाकर टोल टैक्स वसूला जाने लगा.

    आमलोगों की यह है मजबूरी

    लगभग 2 वर्ष से दुमका भागलपुर मुख्य मार्ग पर भारी वाहनों का आवागमन नहीं हो रहा है. जमा थाना क्षेत्र में भुरभुरी नदी पर बना पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण प्रशासन द्वारा वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किया गया. वैकल्पिक मार्ग के तहत भागलपुर से आने वाले वाहन हंसडीहा से चौपा मोड़, सहारा, जारमुंडी होकर दुमका में प्रवेश करेगी. वहीं दुमका से भागलपुर जाने के लिए गुहियाजोरी, रामगढ़ होते हुए हंसडीहा होकर आगे बढ़ेगी. जबकि छोटे वाहनों के लिए बासुकीनाथ नगर पंचायत द्वारा सरडीहा-दर्शनियाटिकट मार्ग को बाईपास का दर्जा दिया गया. जिला प्रशासन द्वारा वैकल्पिक मार्ग को निर्धारित तो कर दिया गया लेकिन वैकल्पिक मार्ग पर परिचालन सुनिश्चित नहीं करवा पाई. वैकल्पिक मार्ग से लंबी दूरी तय करने के बजाय छोटी-बड़ी सभी वाहनों के चालक ने बासुकीनाथ नगर पंचायत के सरडीहा दर्शनिया टिकट बायपास मार्ग को चुना. बासुकीनाथ नगर पंचायत के अभिकर्ता ने इस मार्ग से गुजरने वाले वाहनों से टोल टैक्स वसूलने के लिए नगर पंचायत क्षेत्र से बाहर दर्शनिया टीकर के समीप बैरियर लगा दिया. बासुकीनाथ के सुजीत कुमार कहते हैं कि वाहन चालक भी लगभग 100 किलोमीटर अधिक दूरी तय करने के बजाय ₹200 देकर गाड़ी पार करना उचित समझते.

     रात भर मालवाहक वाहन गुजरने से आम लोग परेशान

    पिछले वर्ष सरडीहा दर्शनियाटीकर बायपास मार्ग पर लगातार दुर्घटना होने के कारण ग्रामीणों ने इस मार्ग पर मालवाहक वाहन के परिचालन का विरोध कर दिया. ग्रामीणों के भारी विरोध के बाद इस वर्ष अघोषित रूप से नया रूट निर्धारित हो गया. दुमका से भागलपुर की ओर जाने वाले वाहन बासुकीनाथ बस पड़ाव और लाइन होटल के सामने दिनभर लगने लगा. वहीं भागलपुर से दुमका आने वाले वाहन पचरोडीह से नोनीहाट तक सड़क किनारे खड़े होने लगे. रात के 9 बजते ही नो एंट्री समाप्त हो जाता है. उसके बाद पहले पचरोडीह मोड़ पर खड़े वाहन को बासुकीनाथ के सघन अधिवास के बीचो-बीच निकालकर जरमुंडी थाना के सामने देवघर दुमका मार्ग पर निकाला जाता है. उसके बाद बासुकीनाथ बस पड़ाव में खड़ी मालवाहक वाहनों को सघन अधिवास के बीचो बीच से होते हुए दर्शनियाटीकर पहुंचाया जाता है. बासुकीनाथ सघन अधिवास के बीचो बीच रात भर मालवाहक वाहन गुजरने से आम लोग परेशान हो गए.

    जांच के लिए टीम का गठन

    किसी ने इसकी शिकायत आयुक्त से कर दी. शिकायत मिलते ही आयुक्त चंद्र मोहन प्रसाद कश्यप ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी गठित की. जांच टीम ने 2 बिंदुओं पर जांच की. एक तो नगर पंचायत क्षेत्र के बाहर बैरियर लगाकर टोल टैक्स की वसूली और दूसरा निर्धारित राशि से अधिक की वसूली. जांच में दोनों ही बिंदु पर शिकायत सही पाया गया. आयुक्त ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि संवेदक को पक्ष रखने के लिए समय दिया गया है. जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर ना केवल उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी बल्कि अवैध तरीके से वसूली गई रकम को भी वापस कराया जाएगा.

    अवैध वसूली का खेल होगा खत्म

    आयुक्त की जांच में यह खुलासा हुआ और हो सकता है कुछ दिनों के लिए अवैध वसूली का यह खेल रुक जाएया. फिर संवेदक पर कार्यवाही भी हो, लेकिन सवाल उठता है कि किसके संरक्षण में अवैध वसूली का यह कारोबार फल-फूल रहा था. शिकायतकर्ता सीधे आयुक्त के पास शिकायत लेकर नहीं पहुंचे होंगे, स्थानीय स्तर पर भी शिकायत की गई होगी. क्षेत्रीय विधायक बादल पत्रलेख सूबे के कृषि मंत्री हैं जो राज्य के साथ-साथ अपने विधानसभा क्षेत्र में जमकर पसीना बहाते हैं. आखिर उनकी नजर इस गोरखधंधे पर क्यों नहीं पड़ी. नगर पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने जनहित को ध्यान में रखकर इसे रोकने का प्रयास क्यों नहीं किया, पुलिस प्रशासन आखिर क्यों मूकदर्शक बनी रहीं.

    रिपोर्ट : पंचम झा, दुमका

     


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