ढुल्लू महतो और संजीव सिंह की राजनीतिक लड़ाई में क्या "हिल" जाएगी महानगर अध्यक्ष की कुर्सी

    धनबाद (DHANBAD): धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो और मेयर संजीव सिंह के बीच चल रही "राजनीतिक लड़ाई" में क्या धनबाद महानगर भाजपा अध्यक्ष की कुर्सी "हिल" जाएगी या प्रदेश इसे भी बर्दाश्त कर लेगा. यह सवाल भाजपा सर्कल में ही तेजी से घूम रहा है. यह बात तो जग जाहिर हो गई है कि मेयर संजीव सिंह कतरास-बाघमारा में उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, तो सांसद ढुल्लू महतो झरिया क्षेत्र को निशाने पर लिए हुए है. अभी हाल ही में 14 मई को उन्होंने झरिया में कार्यक्रम किया और इस कार्यक्रम में बिना नाम लिए संजीव सिंह-रागनि सिंह को टारगेट किया. झरिया में कार्यक्रम कर मेयर संजीव सिंह और विधायक रागिनी सिंह को भी कटघरे में खड़ा किया गया.  

    पार्टी विधायक पर सवाल से बिगड़ रही बात

    वैसे, सांसद ढुल्लू महतो  कहीं भी कार्यक्रम कर सकते है. सब उनके क्षेत्र है,लेकिन अपनी ही पार्टी के विधायक पर अप्रत्यक्ष राजनितिक प्रहार से सवाल खड़े हो रहे है. कहा जा रहा है कि 2029 को टारगेट कर वह उन्हीं जगहों पर विशेष फोकस कर रहे हैं, जहां से उन्हें कोई खतरा महसूस हो सकता है. इसमें झरिया और निरसा को खासतौर पर गिना जा रहा है. दरअसल, 14 मई  को झरिया टैक्सी स्टैंड में आयोजित सांसद सम्मान समारोह के दौरान महानगर जिला अध्यक्ष श्रवण राय के भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और यह मामला प्रदेश तक पहुंच गया.  

    श्रवण राय बिना नाम लिए अप्रत्यक्ष रूप से सवाल करते दिख रहे

    वायरल विडिओ में श्रवण राय बिना नाम लिए झरिया के विधायक पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल करते दिख रहे है. कार्यकर्ता इसे  झरिया विधायक पर राजनीतिक हमला  मान रहे है. यह वीडियो सामने आने के बाद बात और आगे चली गई. क्योंकि सिंह मेंशन समर्थक भी इसमें कूद पड़े और पार्टी के नेताओं को ऐसा नहीं करने की नसीहत दे डाली. उनका कहना है कि आपसी लड़ाई से पार्टी मजबूत नहीं होगी बल्कि कमजोर होगी. यह बात जब रांची पहुंची है, तो प्रदेश अध्यक्ष ने भी इसे गंभीरता से लिया है. 

    वायरल वीडियो की जांच की तैयारी में प्रदेश नेतृत्व 

    हो सकता है कि इस वायरल वीडियो की जांच कराई जाए और श्रवण राय पर कोई एक्शन हो. वैसे श्रवण  राय रागिनी सिंह के खिलाफ बताए जाते है. अभी हाल ही में बिजली-पानी के लिए जब नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की मौजूदगी में धनबाद में  प्रदर्शन हुआ था, तो सभी भाजपा विधायक पहुंचे थे. भाजपा के लोगों को लगने लगा था कि बाबूलाल मरांडी की नसीहत के बाद धनबाद भाजपा में चल रही खींचतान की राजनीति खत्म हो जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं. अलबत्ता विवाद बढ़ता दिख रहा है. भाजपा में गुटबाजी हावी है. अब पूरा मामला प्रदेश के पास है. प्रदेश इसमें क्या कार्रवाई करता है, इस पर सबकी नज़रें टिकी हुई हैं.



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