टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी “अबुआ आवास योजना” काफी चर्चा में है. राज्य के गरीब और बेघर परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना कई मायनों में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) से अलग मानी जा रही है. खासकर उन लोगों के लिए यह योजना उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है, जो किसी कारणवश प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं ले सके थे.
अबुआ आवास योजना को झारखंड सरकार ने राज्य के जरूरतमंद परिवारों को ध्यान में रखते हुए शुरू किया है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे गरीब परिवारों को तीन कमरों वाला पक्का मकान उपलब्ध कराना है, जिनके पास रहने के लिए सुरक्षित घर नहीं है. सरकार का दावा है कि योजना के जरिए लाखों परिवारों को लाभ पहुंचाया जाएगा. अगर प्रधानमंत्री आवास योजना और अबुआ आवास योजना की तुलना करें तो दोनों का लक्ष्य गरीबों को आवास उपलब्ध कराना है, लेकिन इनके काम करने के तरीके और पात्रता में कई अंतर हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना केंद्र सरकार की योजना है, जिसमें लाभुकों का चयन सामाजिक-आर्थिक जनगणना (SECC) और अन्य तय मानकों के आधार पर किया जाता है. कई बार पात्र होने के बावजूद लोगों का नाम सूची में नहीं आ पाता, जिससे वे योजना से वंचित रह जाते हैं.
वहीं अबुआ आवास योजना खासतौर पर उन लोगों के लिए लाई गई है, जिन्हें अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया. झारखंड सरकार ने इसे राज्य स्तर पर लागू करते हुए पात्रता के दायरे को और आसान बनाया है. ग्रामीण और जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता देकर इस योजना में शामिल किया जा रहा है. सबसे बड़ा अंतर आर्थिक सहायता को लेकर भी देखा जा रहा है. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाली राशि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर देती हैं, जबकि अबुआ आवास योजना पूरी तरह राज्य सरकार की योजना है. इसमें लाभुकों को चरणबद्ध तरीके से मकान निर्माण के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है. सरकार का कहना है कि योजना के तहत बनने वाले मकान मजबूत और बेहतर सुविधाओं वाले होंगे. अबुआ आवास योजना की खास बात यह भी है कि इसमें स्थानीय जरूरतों और झारखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया है. कई ग्रामीण इलाकों में रहने वाले आदिवासी और गरीब परिवारों को प्राथमिकता दी जा रही है. यही वजह है कि यह योजना राज्य के दूरदराज क्षेत्रों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है.
राजनीतिक रूप से भी यह योजना काफी अहम मानी जा रही है. झारखंड सरकार इसे गरीबों और ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ी राहत के रूप में पेश कर रही है. सरकार का दावा है कि इस योजना से सिर्फ लोगों को घर ही नहीं मिलेगा, बल्कि उनका जीवन स्तर भी बेहतर होगा. कुल मिलाकर देखा जाए तो प्रधानमंत्री आवास योजना और अबुआ आवास योजना दोनों का उद्देश्य गरीबों को छत देना है, लेकिन अबुआ आवास योजना उन परिवारों के लिए खास बन गई है, जो अब तक सरकारी आवास योजनाओं से बाहर रह गए थे. यही कारण है कि झारखंड में यह योजना तेजी से लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है.

