रांची(RANCHI): देश में नक्सलवाद के खात्मे का दावा लोकसभा में किया गया. गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सल मुक्त भारत का ऐलान किया. ऐसे में झारखंड के सारंडा में नक्सल अभियान की क्या जमीनी हकीकत है, और कितने बड़े माओवादी जंगल में बचे है. आखिर कैसा हाल सारंडा का है. यह सवाल उठ रहा है. सबसे पहले देखे तो सारंडा में आज भी बारूदी जाल बिछा है. जहां कदम कदम पर IED है. साथ ही बड़े माओवादियों के साथ 40 कैडर अभी भी जंगल में मौजूद है.
अगर देखे तो सारंडा का जंगल कई दशकों से माओवादियों का ठिकाना रहा है. और यह गतिविधि 2023 के बाद और बढ़ी जब बूढ़ा पहाड़ नक्सल मुक्त हुआ तो वहां से भी बड़े नक्सली सारंडा पहुंच गए. लेकिन यहां सुरक्षा बल के जवानों का कई साल से अभियान जारी है. कई बड़ी कामयाबी भी मिली. लेकिन दो बड़े एक-एक करोड़ के इनामी चुनौती बन गए. जिनकी तलाश जारी है.
गृह मंत्रालय और झारखंड पुलिस का दावा था सारंडा भी 31 मार्च के बाद नक्सलमुक्त हो जाएगा. लेकिन यहां अब अभी एक करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा,असीम मण्डल समेत कई करोड़ों के इनामी नक्सली मौजूद है. जिनकी तलाश में सुरक्षा बल के जवान अभी भी जंगल में मौजूद है. लेकिन हर बार वह चमका देकर निकल जाता है.
हाल ही में कई मुठभेड़ हुई. जिसमें एक करोड़ के इनामी अनल दा उर्फ तूफान जी समेत 17 माओवादी मारे गए. जिसके बाद माना जा रहा था की अब नक्सलवाद पर बड़ी कार्रवाई शुरू हुई और अंतिम लड़ाई में मिसिर बेसरा ,असीम मण्डल भी या तो सरेंडर करेगा या फिर मुठभेड़ में मारा जाएगा.
अब जब देश नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया. ऐसे में अब भी सारंडा में चुनौती बन कर बड़े नक्सली बैठे है. हलाकी अब यह किसी घटना को अंजाम देने की स्तिथि में नहीं है. संगठन कमजोर हो चुका है.नेटवर्क पूरी तरह से धवस्त हो गया. इन्हे अब गाँव के लोगों का भी पहले के मुकाबले समर्थन नहीं मिल रहा है. जिस वजह से अब कहे की माओवाद अपने अंतिम दौर में है तो गलत नहीं होगा. फिलहाल पूरे हालात पर सुरक्षा बल के जवानों की नजर है.
Thenewspost - Jharkhand
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