झारखंड में पार्टियों का लिट्मस टेस्ट :नौ निगम के चुनाव परिणाम क्यों बताएंगे कि किसमें कितना है दम

    Litmus test for parties in Jharkhand: Why will the election results of nine corporations reveal who has the most power। झारखंड में पार्टियों का लिट्मस टेस्ट :नौ निगम के चुनाव परिणाम क्यों बताएंगे कि किसमें कितना है दम

    धनबाद(DHANBAD):  झारखंड में चल रही निकाय चुनाव की प्रक्रिया के बाद जब चुनाव परिणाम आएगा, तो राजनीतिक दलों की पकड़ का भी जनता को पता चल जाएगा. भाजपा, झामुमो  और कांग्रेस सबको अपनी मजबूती का पता चल जाएगा. लगभग सभी सीटों पर सभी दल किसी न किसी उम्मीदवार को समर्थन दे रहे हैं .  मतलब साफ है कि परिणाम ही बतायेगा  कि फिलहाल किस पार्टी में कितना दम है.  कुल  48 नगर निकायों के लिए चुनाव की प्रक्रिया चल रही है.  नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत में मेयर, अध्यक्ष, वार्ड सदस्य के लिए प्रत्याशी दिन-रात एक किए हुए हैं.  तमाम पार्टियों ने बड़े पदों पर प्रत्याशियों के समर्थन की घोषणा की है.  बागी भी मैदान में हैं.  इस वजह से चुनाव खूब दिलचस्प हो गया है.  सभी पार्टियों की नजर मेयर के पद पर टिकी हुई है.  इस पद पर पार्टियों  की प्रतिष्ठा जुड़ गई है.  

    जानिए कुल नौ नगर निगम में क्या है आरक्षण रोस्टर ?

    दरअसल, जो नगर निगम के चुनाव हो रहे हैं, इसमें आरक्षण रोस्टर भी शामिल है.  जैसे रांची नगर निगम- एसटी के लिए आरक्षित है, वही धनबाद नगर निगम- अनारक्षित है.  मेदनीनगर नगर निगम भी -अनारक्षित है.  हजारीबाग नगर निगम -ओबीसी वन के लिए आरक्षित है, तो गिरिडीह नगर निगम -एससी ,देवघर नगर निगम -अनारक्षित, चास नगर निगम- अनारक्षित, आदित्यपुर नगर निगम- एसटी, मानगो नगर निगम -अ नारक्षित घोषित किया गया है.  दरअसल, पिछला रिकॉर्ड से आगे निकलने के लिए बीजेपी परेशान है, तो झामुमो   भी इस बार ताकत झोंके  हुए है.  कांग्रेस भी उम्मीदवारों  का समर्थन कर रही है.  मतलब सिर्फ एनडीए की परीक्षा नहीं होगी, महागठबंधन की भी परीक्षा होगी.  झारखंड में आगे महागठबंधन का लिटमस टेस्ट भी होगा.

    धनबाद में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने क्या कहा था ?
     
    धनबाद में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा था कि गांव भी हमारा और शहर भी हमारा, इसका मतलब साफ है कि झामुमो  इस बार पूरी मजबूती से मैदान में डटा हुआ है और यह दिख भी रहा है.  अघोषित रूप से झामुमो ने सभी निगम क्षेत्र में काम करने के लिए विधायकों की एक टोली तैयार कर दी है.  और उन्हें जिताने की जिम्मेदारी दी गई है.  तो भाजपा भी अपने समर्थित उम्मीदवारों के लिए विधायक और सांसदों को जिम्मेवारी दी है.  तो कांग्रेस ने भी अपने मंत्रियों तक को इसमें झोंक दिया है.  अब देखना दिलचस्प होगा कि किसके खाते में कितनी सीट  जाती हैं. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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