रांची(RANCHI): झारखंड में बिजली और पानी को लेकर भाजपा बड़े आंदोलन की तैयारी में है. सड़क पर उतर कर प्रदेश भर में प्रदर्शन करने का ऐलान किया है. मई महीने में 6 से लेकर 12 मई तक अलग अलग जिलों में भाजपा सड़क पर राज्य सरकार के खिलाफ आक्रोश मार्च निकालेंगे. इससे पहले बीते 17 अप्रैल को बिजली के मुद्दे पर राज्यव्यापी आंदोलन भाजपा कर चुकी है. इसकी जानकारी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने प्रेस वार्ता कर दी.
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने पानी बिजली संकट से त्राहिमाम कर रही झारखंड की जनता के बीच व्याप्त भारी आक्रोश को आंदोलन के माध्यम से स्वर देने का निर्णय लिया है. इसी निमित्त भारतीय जनता पार्टी द्वारा 6 मई से लेकर 12 मई तक यानि 6 दिनों तक जिलावार जन प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है. आंदोलन की तैयार रूपरेखा के अनुसार 6 मई को गढ़वा, पलामू एवं लातेहार, 7 मई को चाईबासा, जमशेदपुर एवं सरायकेला-खरसावां, 8 मई को हजारीबाग, चतरा, कोडरमा एवं रामगढ़, 9 मई को दुमका, पाकुड़, साहिबगंज, गोड्डा, देवघर एवं जामताड़ा, 11 मई को गिरिडीह, धनबाद एवं बोकारो और 12 मई को रांची, लोहरदगा, सिमडेगा, गुमला एवं खूंटी में भारतीय जनता पार्टी का एक एक कार्यकर्ता सिर पर घड़ा, डेकची सहित पानी ढोने वाले अन्य बर्तन को लेकर प्रदर्शन करेंगे. हमारी पार्टी आँखें मूंदकर नहीं बैठ सकती है. हमारे एक एक कार्यकर्ता इस जनविरोधी सरकार को कुंभकर्णी निद्रा से जगाने का काम करेंगे.
उन्होंने कहा कि पूरा झारखंड पेयजल की घोर किल्लत से त्राहिमाम कर रहा है. प्रदेश भर में लगभग 80000 चापानल खराब पड़े हैं. 72 घंटे में खराब पड़े चापानल को बनाने का सरकारी दावा फिसड्डी साबित हुआ है. सरकार द्वारा जारी टोल फ्री नंबर भी किसी काम का नहीं है. राज्य भर में लोग बूंद बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. जनता की यह पीड़ा राज्य सरकार को महसूस नहीं होती है. काफी दुख का विषय है कि सरकार की रुचि जनसमस्याओं को दूर करने की बजाय पूरी कैबिनेट के साथ दूसरे प्रदेशों में चुनावी दौरा कर पिकनिक मनाने में अधिक है. लगता है, सीएम का फोकस पॉइंट झारखंड की बजाय पड़ोसी राज्य हो गया है. हेमंत सरकार को भले ही आम लोगों की यह पीड़ा महसूस नहीं होती परन्तु भाजपा का एक एक कार्यकर्ता आम लोगों की इस पीड़ा को महसूस कर रहा है.
आदित्य साहू ने कहा कि देशभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर घर को स्वच्छ जल मिले, इसके लिए नल जल योजना के रूप में महत्वाकांक्षी योजना चलाई, इसमें सफलता भी मिली. लेकिन दुखद बात यह है कि 12764 करोड़ रुपए झारखंड में खर्च होने के बावजूद यहां पर यह योजना धरातल पर प्रभावी नहीं दिख रही है. अधिकांश जगहों पर जलापूर्ति कागजों तक ही सीमित है, नल सूखे पड़े हैं. उन्होंने कहा कि वे केवल सुनी सुनाई बातों को नहीं कह रहे हैं बल्कि इस योजना का भुक्तभोगी वे खुद हैं और उदाहरण के तौर पर उनका गांव है, जहां नल तो लगा है, पाइप भी बिछाया गया है लेकिन पानी का एक बूंद आज तक नहीं मिल पाया है. हेमंत सरकार ने इस योजना में भ्रष्टाचार करने का काम किया है. आज भी राज्य में 45% परिवार इस योजना से वंचित हैं. इस योजना की झारखंड में स्थिति यह है कि यह योजना राष्ट्रीय औसत से लगभग 25% पीछे है. देशभर में नीचे से यह दूसरे स्थान पर है.

