बड़ी खबर : PESA संशोधन लागू: ग्राम सभा को मिली और ताकत

    बड़ी खबर : PESA संशोधन लागू: ग्राम सभा को मिली और ताकत

    झारखंड सरकार ने PESA नियमावली 2001 में संशोधन से जुड़ा नया नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके तहत ग्राम सभा की शक्तियों और कार्यप्रणाली को और स्पष्ट किया गया है. यह आदेश 2 जनवरी 2026 से लागू माना जाएगा और सभी जिला प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों व संबंधित विभागों को पालन के लिए भेजा गया है.

    नोटिफिकेशन की मुख्य बातें
    ग्राम सभा की बैठक बुलाने, कार्यवृत्त लिखने, उपस्थित सदस्यों का विवरण और लिए गए निर्णयों के लिए अलग-अलग प्रपत्र निर्धारित किए गए हैं, जिन पर ग्राम सभा सदस्यों व अधिकारियों के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे.
    ग्राम सभा में शामिल होने वाले पात्र सदस्यों की सूची, अनुपस्थित सदस्यों का विवरण और बैठक के एजेंडा को अब रिकॉर्ड में रखना जरूरी किया गया है.

    ग्राम सभा की शक्तियां
    अधिसूचना में जमीन हस्तांतरण, प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग, विकास योजनाओं की स्वीकृति, सामाजिक न्याय और कानून-व्यवस्था जैसे विषयों पर ग्राम सभा की अनुमति को आवश्यक बताया गया है.
    SC-ST भूमि, वन भूमि, खनन, शराब दुकान, बाजार, मेले और स्थानीय संसाधनों के दोहन से जुड़ी योजनाओं पर बिना ग्राम सभा की सहमति के निर्णय नहीं लिए जा सकेंगे.

    उल्लंघन और दंड प्रावधान
    भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं का उल्लेख करते हुए ग्राम सभा के निर्णयों की अवहेलना, रिकॉर्ड में हेरफेर, गलत सूचना देने और भ्रष्टाचार जैसे मामलों के लिए सजा व जुर्माने के प्रावधान बताए गए हैं.
    संबंधित अधिकारी या जनप्रतिनिधि यदि नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के साथ-साथ सेवा संबंधी कार्रवाई भी की जा सकेगी.

    प्रशासन को निर्देश
    सभी उपायुक्त, उप विकास आयुक्त, जिला परिषद, प्रखंड विकास पदाधिकारी और पंचायत सचिवों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र की सभी ग्राम सभाओं में नए प्रपत्रों का उपयोग और नियमों की जानकारी सुनिश्चित करें.
    पंचायत प्रतिनिधियों को कहा गया है कि वे ग्राम सभाओं की नियमित बैठकों, पारदर्शी लेखा-जोखा और ग्रामीणों की भागीदारी के लिए जागरूकता अभियान चलाएं.

    ग्रामीणों पर असर
    नए प्रावधानों से आदिवासी व अन्य ग्रामीण समुदायों को स्थानीय संसाधनों, भूमि और विकास योजनाओं पर अधिक सीधी भागीदारी और नियंत्रण मिलेगा.
    पारदर्शिता बढ़ने से ग्राम सभा के निर्णयों को कानूनी मजबूती मिलेगी और ग्रामीण स्तर पर होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगाने में आसानी होगी.



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