सुनवाई से पहले ही मौत! झारखंड जेल में याचिकाकर्ता की संदिग्ध मौत पर HC सख्त, लिया ये एक्शन

    सुनवाई से पहले ही मौत! झारखंड जेल में याचिकाकर्ता की संदिग्ध मौत पर HC सख्त, लिया ये एक्शन

    TNP DESK:झारखंड उच्च न्यायालय से एक बेहद ही चौंकाने वाली खबर सामने आई है गुरुवार को एक सुनवाई के दौरान कुछ ऐसा सामने आया जो आपको सच में सकते में डाल सकता है और यह जेल के व्यवस्था पर सवाल भी खड़ा कर रहा है अदालत को बताया गया कि एक अपील करता जो गंभीर किडनी बीमारी से जूझ रहा था जेल में उसे पर्याप्त इलाज नहीं मिला इसी दौरान उसकी मौत हो गई. 

    यह मामला जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ के समक्ष चल रही एक आपराधिक अपील से जुड़ा था. सुनवाई के दौरान यह बताया गया कि अपीलकर्ता ने पहले ही अपनी सजा को निलंबित करने और बेहतर इलाज के लिए जमानत पर रिहाई की मांग की थी, क्योंकि जेल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाएं उसकी हालत के लिए पर्याप्त नहीं थीं.

    याचिकाकर्ता का कहना था कि जेल में उसका समुचित इलाज संभव नहीं है और बाहर किसी निजी अस्पताल में उपचार ही उसके लिए एकमात्र विकल्प है. इस बीच राज्य सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था, लेकिन इससे पहले ही कैदी की मौत हो गई.

    इस घटना ने अदालत को झकझोर कर रख दिया. सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि राज्य की जेलों में डॉक्टरों की भारी कमी है. जानकारी के अनुसार, 43 स्वीकृत पदों में से 42 पद खाली पड़े हैं, जिससे कैदियों को बनियादी स्वास्थ्य सेवाएं भी नहीं मिल पा रही हैं.

    मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में पद खाली क्यों हैं और जेलों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति इतनी खराब क्यों है. साथ ही अदालत ने इस पूरे मुद्दे को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष भी भेज दिया है, ताकि इस पर व्यापक स्तर पर सुनवाई हो सके.

    इस बीच अदालत ने मृतक अपीलकर्ता के परिजनों को राहत देते हुए उन्हें राज्य सरकार से मुआवजे की मांग करने की अनुमति भी दे दी है. यह फैसला न सिर्फ एक परिवार के लिए न्याय की दिशा में कदम है, बल्कि राज्य की जेल व्यवस्था में सुधार की जरूरत को भी उजागर करता है.



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