गुरिल्ला आर्मी का सदस्य, घात लगाकर हमला करने में माहिर उग्रवादी संतोष ने पुलिस ने समक्ष डाला हथियार, जानिए कुख्यात नक्सली संतोष के बारे में

    गुरिल्ला आर्मी का सदस्य, घात लगाकर हमला करने में माहिर उग्रवादी संतोष ने पुलिस ने समक्ष डाला हथियार, जानिए कुख्यात नक्सली संतोष के बारे में

    रांची (RANCHI) : रांची का आतंक कहे जाने वाला टीएसपीसी संगठन का सक्रिय सदस्य एलजीएस 1 लाख का इनामी  उग्रवादी संतोष गंझू ने आज रांची पुलिस के समक्ष आत्म समर्पण कर दिया. सरकार की आत्म समर्पण और पुर्नवास  नीति से प्रभावित होकर सीआरपीएफ 133 बटालियन और रांची पुलिस के प्रयास से उग्रवादी ने पुलिस के समक्ष आत्म समर्पण किया है. संतोष  गंझू  पर दो मामले ओरमांझी थाना में दर्ज है. बता दें कि संतोष गंझू  मूल रूप से बुढ़मू थाना क्षेत्र रहने वाला है. कई वारदात  में इसकी अहम भूमिका रही है.लेकिन बढ़ती पुलिसिया दबिश और सरकार के नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण का फ़ैसला किया. रांची एसएसपी और CRPF के अधिकारियों ने उग्रवादी का स्वागत फूल माला देकर किया है.

    गोरिल्ला आर्मी का सदस्य है संतोष गंजू

    रांची एसपी चंदन कुमार सिन्हा ने बताया कि संतोष गंजू टीएसपीसी के गोरिल्ला आर्मी का सदस्य है. घातक हमले करने में काफी अहम भूमिका इसकी संगठन में होती है. उन्होंने बताया  कि सीआरपीएफ के कमांडेंट और रांची पुलिस उग्रवादी के परिवार वालों से मुलाकात कर उसके परिवार के लोगों को मुख्य धारा में शामिल संतोष गंझू को करने को लेकर समझाया इसके बाद संतोष गंजू आत्मसमर्पण करने को राजी हुआ. संतोष गंजू  पर दो मामले रांची जिले में दर्ज है इसके अलावा दर्शन ऑन दर्जनों मामलों में संलिप्तता इसकी रही है. इसकी गिरफ्तारी से टीसीएस संगठन को एक बड़ी चोट पहुंची है. साथ ही एसएसपी ने कहां कि रांची पुलिस अपील करती है कि जो भी उग्रवादी जंगलों में है हिंसा के रास्ते को अपना रहे हैं. वह मुख्य धारा में लौटे और आत्मसमर्पण कर दें.

    टीएसपीसी उग्रवादी संगठन में 2 साल थी अहम भूमिका

    उग्रवादी संतोष गंझू ने बताया कि टीएसपीसी उग्रवादी संगठन में 2 साल इसकी अहम भूमिका थी. उसके बाद परिवार के लोगों ने समझाया कि हिंसा के रास्तों को छोड़े तो वह कुछ दिनों के लिए झारखंड छोड़कर दूसरे राज्य पलायन कर गया घर परिवार को साथ लेकर राजस्थान चला गया था. बाद में इनका संपर्क सीआरपीएफ और रांची पुलिस से हुआ इसके बाद मन बनाया कि हिंसा के रास्ते को छोड़ मुख्य धारा में लौट जाएंगे. यही कारण है कि उन्होंने आज आत्म समर्पण कर दिया. संतोष ने अपने अन्य साथियों से भी अपील किया है कि उग्रवाद का रास्ता खतरनाक होता है. इसमें जिंदगी का कोई ठिकाना नहीं होता. सरकार की आत्म समर्पण नीति के तहत अन्य साथी भी समर्पण कर दे. उससे उनकी जिंदगी बेहतर हो जाएगी.

    रिपोर्ट. समीर हुसैन 


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