रांची में अपराधियों के निशाने पर दुकान और कारोबारी , पुलिस बेबस

    रांची में अपराधियों के निशाने पर दुकान और कारोबारी , पुलिस बेबस

    रांची(RANCHI): राजधानी रांची में पुलिस का इकबाल खत्म होता जा रहा है.  पिछले कुछ महीनों से अपराधिक घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है. अपराधी आए दिन लगातार घटना को अंजाम दे रहे हैं.  निशाने पर हैं कारोबारी और जमीन से जुड़े लोग.  पिछले कुछ महीनों में कई हत्याएं हुई हैं, जिसे लेकर कारोबारियों में दहशत है. कभी पीएलएफआई संगठन तो कभी संगठित गिरोह के लोग रंगदारी की मांग करते हैं तो कभी बेखौफ तरीके से दुकानों में डाका डाल देते हैं.  वो भी सरेआम. सवाल है आखिर पुलिस और उनका तंत्र कहां है.  राजधानी इतना असुरक्षित कैसे बन गई.

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    हाल के कुछ मामले को देखें

    चान्हो थाना क्षेत्र में छेड़खानी का विरोध करने पर अपराधियों ने दो युवकों को गोली मार दी. वहीं बीच-बचाव करने आए एक और युवक पर गोली चला दी जिसमें दो युवक की घटनास्थल पर ही मौत हो गई.  जबकि घायल युवक का इलाज रिम्स में चल रहा है.

     

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    दो चर्चित हत्या  

    पिछले महीने 29 तारीख को रांची के चर्चित व्यवसाय कमल भूषण की अपराधियों ने दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी.  कमल भूषण की हत्या व्यस्तम इलाके पिस्का मोड़ के पास की गई.  इस मामले में दो दिन बीतने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली है.  कमल भूषण की हत्या के पूर्व 15 मई को सुखदेव नगर थाना क्षेत्र में एक सीमेंट व्यवसाय की हत्या अपराधियों ने धारदार हथियार से गला रेत कर कर दी थी.  हालांकि इस मामले में पुलिस ने सभी आरोपियों को 24 घंटे के अंदर गिरफ्तार कर लिया था.

    आभूषण दुकान में लूट

    5 मई को लालपुर इलाके में आभूषण दुकान से अपराधियों ने दिनदहाड़े 25 लाख  रुपए के गहनों को लूट लिया.  दुकान में अपराधी दुकानदार बन कर आए थे . इसके अलावा रातू रोड के देवी मंडप के पास ज्वेलर्स दुकान पर अपराधियों ने ₹500000 के जेवरात लूट लिए. वहीं दुकान पर बैठे उदय कुमार और उनके 12 वर्ष के बेटे पर गोली चला दी.  लेकिन गोली उन्हें लगी नहीं वह बाल-बाल बच गए.

    ज्यादातर मौके पर मौजूद नहीं रहते रक्षक

    पुलिस पेट्रोलिंग के पीछे लिखा होता है रक्षक. लेकिन ज्यादातर मौके पर यह रक्षक मौजूद नहीं रहते. जबकि राजधानी में सैकड़ों पीसीआरओ पेट्रोलिंग गाड़ी मौजूद है, इसके बावजूद अपराधिक घटना को अंजाम देकर आराम से फरार हो जाते हैं. अलबत्ता बाद में जरूर कुछ लोगों की अरेस्टिंग हो जाती है. कुल मिलाकर पुलिस की साख दांव पर है. पुलिस आने वाले दिनों में अपने तंत्र को मजबूत नहीं करती तो अपराध और बढ़ेंगे.


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