टीएनपी डेस्क(TNP DESK):हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत बड़ा महत्व माना जाता है.हर महीने दो एकादशी आती है एक शुक्ल पक्ष की और दूसरी कृष्ण पक्ष की.लोग इस दिन व्रत रखते है और भगवान विष्णु की पूजा करते है.माना जाता है कि एकादशी का व्रत करने से पुण्य मिलता है, मन शांत रहता है और जीवन में सकारात्मकता आती है.कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर महीने में दो ही एकादशी क्यों आती है.इसका जवाब हिंदू पंचांग और चंद्रमा की चाल में छिपा है.दरअसल, हिंदू कैलेंडर चंद्रमा की गति पर आधारित होता है.चंद्रमा लगभग 29.5 दिनों में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करता है, जिसे चंद्र मास कहा जाता है.
दो भागों में बांटा गया है चंद्र मास
इस चंद्र मास को दो भागों में बांटा गया है शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष.शुक्ल पक्ष वह समय होता है जब चंद्रमा अमावस्या के बाद बढ़ते-बढ़ते पूर्णिमा तक पहुंचता है.वहीं कृष्ण पक्ष वह समय होता है जब चंद्रमा पूर्णिमा के बाद घटते-घटते अमावस्या तक आ जाता है.हर पक्ष में 15-15 तिथियाँ होती हैं और उनमें से ग्यारहवीं तिथि को एकादशी कहा जाता है। इसी वजह से हर महीने दो एकादशी आती हैं—एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में.
एकादशी व्रत शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी
धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी का दिन बहुत पवित्र होता है. इस दिन भगवान विष्णु की विशेष कृपा मानी जाती है. लोग उपवास, भजन-कीर्तन और पूजा करके अपने जीवन को शुद्ध करने का प्रयास करते है साथ ही यह भी माना जाता है कि एकादशी व्रत शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी होता हैउपवास से शरीर को आराम मिलता है और मन में संयम और एकाग्रता बढ़ती है.वैज्ञानिक दृष्टि से भी चंद्रमा का प्रभाव मानव मन और भावनाओं पर पड़ता है. इसलिए एकादशी को ध्यान और आत्मसंयम का अच्छा समय माना गया है.इस तरह एकादशी सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि प्रकृति, विज्ञान और मानव जीवन के संतुलन से भी जुड़ी हुई एक महत्वपूर्ण तिथि है.

