आदिवासी समाज का अनोखा स्वाद, लाल चींटी से बनती है स्वादिष्ट चटनी, पढ़िए क्यों है खास

    आदिवासी समाज का अनोखा स्वाद, लाल चींटी से बनती है स्वादिष्ट चटनी, पढ़िए क्यों है खास

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK):आदिवासी समाज की धार्मिक और पारंपरिक संस्कृति हमेशा से लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रही है. शादी-विवाह की रस्मों से लेकर त्योहारों और पारिवारिक परंपराओं तक, आदिवासी समुदाय की जीवनशैली बेहद अनोखी और दिलचस्प मानी जाती है. यही खासियत उनके खानपान में भी देखने को मिलती है.झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में रहने वाले आदिवासी समुदाय के लोग अपने पारंपरिक व्यंजनों के लिए काफी प्रसिद्ध है.इन व्यंजनों में सबसे ज्यादा चर्चा लाल चींटी से बनने वाली खास चटनी की होती है, जिसे कई जगहों पर “चापड़ा चटनी” के नाम से जाना जाता है.

    आदिवासी समाज के बीच बेहद लोकप्रिय है चटनी

    यह चटनी आदिवासी समाज के बीच बेहद लोकप्रिय है और लोग इसे बड़े स्वाद और चाव के साथ खाते हैं। अपने तीखे और खट्टे स्वाद के कारण यह चटनी बाकी पारंपरिक व्यंजनों से बिल्कुल अलग पहचान रखती है.लाल चींटियों और उनके अंडों को जंगलों से सावधानी के साथ इकट्ठा किया जाता है. इसके बाद उन्हें साफ कर हरी मिर्च, लहसुन, अदरक और नमक के साथ सिलबट्टे पर पीसकर चटनी तैयार की जाती है.कई जगहों पर स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें टमाटर और धनिया पत्ता भी मिलाया जाता है.

    स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद

    स्थानीय लोगों का मानना है कि यह चटनी सिर्फ स्वाद में ही खास नहीं होती, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है. यही वजह है कि यह व्यंजन आज भी आदिवासी समाज की पारंपरिक पहचान बना हुआ है.आज हम इसी अनोखी और मशहूर चटनी के बारे में बात कर रहे है, जो आदिवासी संस्कृति और उनके पारंपरिक खानपान की एक खास झलक पेश करती है.



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