धर्म-कर्म: शुक्रवार और मां लक्ष्मी का क्या संबंध है? जानिए इसके पीछे की पूरी मान्यता

    धर्म-कर्म: शुक्रवार और मां लक्ष्मी का क्या संबंध है? जानिए इसके पीछे की पूरी मान्यता

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK):माता लक्ष्मी को धन वैभव का प्रतीक माना जाता है.सनातन धर्म में शुक्रवार का दिन विशेष रूप से माँ लक्ष्मी की पूजा के लिए समर्पित है. माना जाता है कि इस दिन पूजा करने से देवी लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न होती है और भक्तों पर कृपा बरसाती है.इसके पीछे धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों ही कारण बताए जाते है.

    शुक्र ग्रह को सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य, भोग-विलास और सौंदर्य का कारक

    वही ज्योतिष के अनुसार शुक्रवार का संबंध शुक्र ग्रह से होता है. शुक्र ग्रह को सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य, भोग-विलास और सौंदर्य का कारक माना जाता है.वहीं माँ लक्ष्मी को धन, वैभव और सौभाग्य की देवी कहा गया है. इसलिए जब शुक्र ग्रह का प्रभाव मजबूत होता है, तो उस दिन लक्ष्मी पूजा को अत्यंत शुभ माना जाता है.मान्यता यह भी है कि शुक्रवार को घर में साफ-सफाई, पूजा-पाठ और भक्ति करने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और दरिद्रता दूर होती है. इस दिन श्रद्धा से माँ लक्ष्मी की पूजा करने पर आर्थिक समस्याएँ कम होती हैं और जीवन में स्थिरता आती है.

    लक्ष्मी जी स्वच्छता और शांति पसंद करती है

    शास्त्रों में कहा गया है कि लक्ष्मी जी स्वच्छता और शांति पसंद करती है. इसलिए शुक्रवार को घर को साफ रखना, दीपक जलाना और भक्ति भाव से पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है.कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं ताकि माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त हो सके.इसके अलावा यह भी मान्यता है कि शुक्रवार को की गई पूजा से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है और सुख-समृद्धि बनी रहती है.व्यापार और नौकरी में भी प्रगति के अवसर बढ़ते है.इसी कारण शुक्रवार को माँ लक्ष्मी की पूजा को अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है और यह परंपरा सदियों से चली आ रही है.



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