चैती नवरात्रि : जमशेदपुर का ऐसा जागृत देवी मंदिर जहां से वाहन लेकर गुजरने से पहले लेनी पड़ती है माता की आज्ञा

    Rabkini mamdir jamshedpur:सड़क यात्रा के दौरान हमें कई देवी देवताओं के मंदिर देखने को मिल जाते है जिनकी कहानी अपने आप में काफी अनोखी होती है, जो जन आस्था से जुड़ी होती है एक ऐसा ही मंदिर जमशेदपुर में भी स्थित है जिसकी अपनी ही पुरानी मान्यता और कहानी है. ऐसा माना जाता है कि मंदिर के पास से गुजरने वाली सड़क से जितने लोग भी गाड़ी लेकर जाते है उन्हें पहले माता से अनुमति लेनी पड़ती है, तभी वह आगे बढ़ सकते है

    चैती नवरात्रि  : जमशेदपुर का ऐसा जागृत देवी मंदिर जहां से वाहन लेकर गुजरने से पहले लेनी पड़ती है माता की आज्ञा

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK):सड़क यात्रा के दौरान हमें कई देवी देवताओं के मंदिर देखने को मिल जाते है जिनकी कहानी अपने आप में काफी अनोखी होती है, जो जन आस्था से जुड़ी होती है एक ऐसा ही मंदिर जमशेदपुर में भी स्थित है जिसकी अपनी ही पुरानी मान्यता और कहानी है. ऐसा माना जाता है कि मंदिर के पास से गुजरने वाली सड़क से जितने लोग भी गाड़ी लेकर जाते है उन्हें पहले माता से अनुमति लेनी पड़ती है, तभी वह आगे बढ़ सकते है.चलिए आज हम जमशेदपुर के रंकणी मंदिर से जुड़ी एक ऐसी अनोखी और पौराणिक कथा के बारे में बताते है जिस पर आज भी लोगों को काफी ज्यादा विश्वास है.

    1.   वाहन लेकर गुजरने से पहले लेनी पड़ती है माता की आज्ञा

    आपको बता दें कि जमशेदपुर का यह प्रसिद्ध मंदिर घाटशिला जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 33 पर स्थित है, जिसका नाम श्री श्री काली मंदिर है जो अपनी अनोखी, अद्भुत इतिहास को लेकर काफी प्रसिद्ध है. यह मंदिर एक ऐसी अनोखी जगह है पर स्थित है जो एक सामान्य जगह नहीं है,हाईवे के बीचो बीच यह मंदिर बना हुआ है.मंदिर के पुजारी की माने तो इस मंदिर को किसी ने नहीं बनाया है बल्की या एक बड़ी चट्टान के रूप में खुद माता काली का रूप है, जो अपने आप उत्पन्न हुई थी. जब हाईवे का काम हो रहा था उसी समय क्या चट्टान को हटाने की कोशिश की जा रही थी लेकिन हर बार चट्टान हटाने के दौरन कोई ना कोई बड़ी घटना हो रही थी जिसके बाद लोगों ने इसे माता की चेतावनी मानते हुए चट्टान को वहीं छोड़ दिया वही इस जगह पर सुंदर सा मंदिर बना दिया गया.

    मंदिर के पास गाड़ी की गति अपने आप हो जाती है धीमी

     मंदिर से एक अदभुत कहानी जुड़ी हुई है जिससे लोगों की अदभुत श्रद्धा है. मंदिर साल 1984 में पूरी तरीके से बना था, तब से लेकर आज तक हजारों लोग यहां रोजाना आते है और माता के दर्शन करते है.हाइवे के बगल में होने की वजह से रोजाना यहां सैकड़ो गाडियां पार होती है लेकिन खुद ब खुद गाडियां मंदिर के पास आते ही धीमी हो जाती है.लोगों का मनाना है कि मां काली के चरणों में रुकने का संदेश होता है जहां प्रणाम करने और अनुमति लेने के बाद ही लोग आगे बढ़ते है.वही सबसे अद्भुत बात यह है कि जब से यह मंदिर बनाया गया तब से इस रास्ते में हादसे से बहुत कम हुए है. यात्रियों का मनाना है कि माता काली का आशीर्वाद इस सड़क को सुरक्षित रखता है और सभी को सभी की यात्रा मंगलमय होती है.


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