टीएनपी डेस्क(TNP DESK):सनातन धर्म में सूर्य देव को प्रतिदिन जल अर्पित करना शुभ माना गया है.विशेष रूप से रविवार के दिन सूर्य पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है.मान्यता है कि सूर्य देव को अर्घ्य देने से जीवन में ऊर्जा, सफलता, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है लेकिन कई बार लोग अनजाने में कुछ गलतियां कर बैठते हैं, जिससे पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता.सूर्य देव को जल अर्पित करने की सही विधि के अनुसार, प्रातःकाल सूर्योदय के समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए.तांबे के लोटे में स्वच्छ जल भरकर उसमें लाल फूल, अक्षत और थोड़ी सी रोली मिलाई जाती है. इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है. जल की धार सूर्य की किरणों से होकर गिरनी चाहिए.
“ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जप
अर्घ्य देते समय “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जप करना अत्यंत फलदायी होता है. इससे मन शांत रहता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.हालांकि, पूजा के दौरान कुछ गलतियों से बचना जरूरी है। पहली गलती यह है कि गंदे या अपवित्र जल का उपयोग न करें.दूसरी, अर्घ्य देते समय जूते-चप्पल पहनना अशुभ माना जाता है.तीसरी, सूर्य को सीधे खाली आंखों से लंबे समय तक देखना नुकसानदायक हो सकता है. चौथी गलती यह है कि बिना स्नान किए या अपवित्र अवस्था में अर्घ्य देना पूजा को निष्फल कर सकता है.
जीवन में मिलेगा सुख-समृद्धि, मान-सम्मान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि सही विधि और श्रद्धा के साथ सूर्य देव को जल अर्पित किया जाए, तो जीवन में सुख-समृद्धि, मान-सम्मान और सफलता के मार्ग खुलते है.नियमित रूप से यह साधना करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलते है.

