जयंती विशेष: हिंदू कुल में जन्म लेने के बाद भी पसंद नहीं था हिंदू धर्म, पढ़ें डॉ भीमराव अंबेडकर के बौद्ध धर्म अपनाने की वजह    

    जयंती विशेष: हिंदू कुल में जन्म लेने के बाद भी पसंद नहीं था हिंदू धर्म, पढ़ें डॉ भीमराव अंबेडकर के बौद्ध धर्म अपनाने की वजह    

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK):आज 14 अप्रैल के दिन पूरा देश डॉ भीमराव अंबेडकर की 133वीं जयंती मना रहा है. देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग संविधान के जनक कहे जाने वाले डॉ भीमराव अंबेडकर को याद और नमन कर रहे हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को यह जानकारी होगी कि आखिर भीमराव अंबेडकर ने हिंदू धर्म को छोड़कर बौद्ध धर्म अपनाने का फैसला क्यों लिया. इस बात की जानकारी तो सभी को होगी कि भीमराव अंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया था लेकिन इसके पीछे की वजह बहुत लोगों को नहीं पता होगी तो आज हम आपको इस आर्टिकल के जरिए बताएंगे कि आखिर इसके पीछे की वजह क्या थी.   

    बचपन से ही किया छूआछूत का सामना 

     आपको बताएं कि भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश में हुआ था, उनका जन्म एक दलित परिवार में होने की वजह से उन्हें जात-पात को लेकर बहुत सारे भेदभाव समाज में झेलना पड़ा, इसकी एक गहरी छाप उनके दिमाग में रही, नीचे कुल में जन्म लेने की वजह से बचपन से ही उन्हें छुआछूत का सामना करना पड़ा और समाज में उनके साथ भेदभाव होता रहा.आपको बताएं कि निचले जाति में जन्म लेने की वजह से उन्हें हमेशा से ही तिरस्कार झेलना पड़ा और छुआछूत का सामना करना पड़ा बचपन से ही उन्होंने इस चीज का विरोध करने की कोशिश की लेकिन वह इस लायक नहीं थे कि किसी को उनकी बात से कोई फर्क पड़ता. 

    बाबा साहेब ने समाज में फैले भेदभाव और जाति प्रथा के खिलाफ लड़ाई लड़ी

     वहीं बड़े होकर भीमराव अंबेडकर कानून और सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई की, और पढ़ाई लिखाई कर समाज से छुआछूत को दूर करने की ठानी. उन्हें समाज के निचले वर्ग, गरीब तबके, मजदूर और महिलाओं को सशक्त बनाने की लंबी लड़ाई समाज के खिलाफ लड़ी, और सभी को बराबरी का हक दिलाने को लेकर बहुत सारे जरूरी कदम उठाए और उन्हें सशक्त बनाने की लंबी लड़ाई लड़ी. जिसका परिणाम आज हमें देखने को मिलता है तो आज हम बात कर रहे हैं कि आखिर हिंदू धर्म अपनाने के बौद्ध धर्म अपनाने के पीछे बाबासाहेब की क्या मनसा थी.  

     पढ़ें डॉ भीमराव अंबेडकर के बौद्ध धर्म    

    बाबा साहेब हिंदू धर्म में जन्म लेने के बाद भी बाबासाहेब के मन में इस धर्म को लेकर उतना विश्वास नहीं था, इसको लेकर उनके मन में हमेशा से एक सवाल उठता रहा.लोगों के मन में यह जिज्ञासा रहती है कि आखिर भीमराव अंबेडकर के बौद्ध धर्म अपनाने के पीछे वजह क्या थी तो आपको बता दें कि इसका जवाब बाबा साहेब द्वारा लिखे अंग्रेजी लेख Buddha and the Future of his Religion में मिलता है. जिसमे बाबा साहेब ने सारे धर्मों हिंदु, इस्लाम और सिख की तुलना की है.ये लेख 1950 में छपी थी.जिसमे बाबा साहेब भीमराव अंबेदकर को बुद्ध धर्म पसंद आया, बाबा साहेब ने कहा था कि धर्म की दृष्टि से बुद्ध धर्म सबसे श्रेष्ठ है.

    बाबा साहेब ने 14 अक्टूबर 1956 को हिंदू धर्म छोड़ने का निर्णय लिया

    इसके बाद बाबा साहेब अंबेडकर ने 13 अक्टूबर 1935 में हिंदू धर्म छोड़ने का निर्णय लिया और 14 अक्टूबर 1956 में बौद्ध धर्म अपना लिया, और कहा कि मुझे ऐसा धर्म पसंद है, जो स्वतंत्रता समानता और बंधुत्वता को बढ़ावा देता हो, और सबको बिना भेदभाव के साथ रहना सिखाता हो, क्योंकि मनुष्य के विकास के लिए इन चीज तीन चीजों की जरूरत होती है ना की जात-पात या उच्च नीच की जरुरत होती है.


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