इस दिन से हो रही है चैती छठ की शुरुआत, पढ़े 4 दिनों तक चलने वाले पर्व की सही तारीख

    Chaitra chath:चैती नवरात्र के दिन चल रहे है आज चैत नवरात्र का दुसरा दिन है चैत के महीने में जहां रामनवमी दुर्गा पूजा का त्यौहार आता है, तो वही छठ महापर्व भी इसी महीने में पड़ता है.आपको बता दें कि चार दिनों तक चलने वाला सूर्य आराधना का ये महापर्व साल में दो बार मनाया जाता है. एक बार कार्तिक के महीने में तो दूसरा चैत्र के महीने में पूरी श्रद्धा भक्ति और साफ सफाई के साथ छठ महापर्व चैत के महीने में भी ठीक उसी तरह व्रत रखा जाता है जिस तरह से कार्तिक महीने में रखा जाता है

    इस दिन से हो रही है चैती छठ की शुरुआत, पढ़े 4 दिनों तक चलने वाले पर्व की सही तारीख

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): चैती नवरात्र के दिन चल रहे है आज चैत नवरात्र का तीसरा दिन है चैत के महीने में जहां रामनवमी दुर्गा पूजा का त्यौहार आता है, तो वही छठ महापर्व भी इसी महीने में पड़ता है.आपको बता दें कि चार दिनों तक चलने वाला सूर्य आराधना का ये महापर्व साल में दो बार मनाया जाता है. एक बार कार्तिक के महीने में तो दूसरा चैत्र के महीने में पूरी श्रद्धा भक्ति और साफ सफाई के साथ छठ महापर्व चैत के महीने में भी ठीक उसी तरह मनाया है जिस तरह से कार्तिक महीने में रखा जाता है.चैती छठ का व्रत खास तौर पर बिहार झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है.4 दिनों तक चलने वाला छठ पर्व ऐसा महापर्व है जिसमे नहाए खाए के साथ दूसरे दिन खरना तीसरे दिन संध्या अर्घ्य चौथा दिन सुबह के अर्घ्य के साथ संपन्न होता है.

     पढ़े 4  दिनो तक चलने वाले पर्व की सही तारीख

    ऐसे में अब सबके मन में यह बात आ रही है कि साल 2026 में चैती छठ की शुरुआत किस दिन से हो रही है तो आपको बता दें कि छठ महापर्व की शुरुआत साल 2026 में 22 मार्च से होगी जहां पहले दिन 22 मार्च को यानि रविवार के दिन नहाए खाए के साथ छठ महापर्व की शुरुआत होगी.वहीं 23 मार्च 2026 सोमवार के दिन खरना पूजा किया जाएगा. 24 मार्च 2026 मंगलवार के दिन संध्या अर्घ्य  दिया जाएगा, जहां डूबते हुए सूर्य को छठ व्रती अर्घ्य देंगे.वही 25 मार्च बुधवार के दिन उषा अर्ध यानि चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य  देकर इस चैती छठ महापर्व का समापन हो जायेगा.

    साल में दो बार आता है छठ महापर्व

    आपको बता दे की छठ महापर्व एक ऐसा महापर्व है जो बिहार झारखंड और उत्तर प्रदेश में काफी श्रद्धा भक्ति के साथ मनाया जाता है.छठ महापर्व साल में दो बार आता है जहां कार्तिक माह में पड़ने वाले छठ का व्रत ज्यादा लोग रखते है.हालांकी चैत्र महीने पड़ने वाले छठ महापर्व का व्रत बहुत कम लोग रखते है ऐसा कहते है कि गर्मी का दिन होने की वजह से छठ व्रतियों को काफी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है.बहुत से लोग मन्नत के तौर पर भी चैती छठ को करते है.

    आपको बता दें कि नहाए खाए यानि पहले दिन चैती छठ पर्व की शुरुआत की जाती है. इस दिन छठ व्रत रखने वाली महिलाएं या पुरुष नदी या तालाब में जाकर स्नान करते है और सात्विक भोजन करते है. जिसमे अरवा चावल, चने की दाल और लौकी की सब्जी बिना लहसुन प्याज के बनाया जाता है जिससे छठ व्रत करने वाले लोग ग्रहण करते है.वही व्रत के दूसरे दिन खरना पूजा की जाती है.जहां छठ व्रत रखने वाले लोग दिन भर निर्जिला व्रत रखते है और शाम के समय सूर्य की उपासना करने के बाद गुड़ की खीर और रोटी प्रसाद के रुप में ग्रहण की जाती है.संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन)- छठ पूजा के तीसरे दिन व्रती शाम में डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते है. इसलिए इस दिन को संध्या अर्घ्य के नाम से जाना जाता है.उषा अर्घ्य (चौथा दिन)- ये छठ पर्व का चौथा और आखिरी दिन है. इस दिन उगते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है और इसके बाद व्रती अपना उपवास खोल लेते है.


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