भोलेनाथ के प्रिय महीने सावन की शुरुआत, जानें नीलकंठ नाम पड़ने की पूरी कहानी

    भोलेनाथ के प्रिय महीने सावन की शुरुआत, जानें नीलकंठ नाम पड़ने की पूरी कहानी

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK):सावन के पावन महीने की शुरुआत 4 जुलाई यानी आज से हो गई है. वहीं इसका समापन 31 अगस्त को होगा. इस बार मलमास लगने की वजह से सावन 2 महीने का होगा. वैसे तो हर बार 4 ही सोमवारी का व्रत रखा जाता है. लेकिन इस बार 8 सोमवारी का व्रत रखा जायेगा. सावन की पहली सोमवारी 10 जुलाई, दूसरी 17 जुलाई, तीसरी 24 जुलाई, चौथी 31 जुलाई, पांचवी 7 अगस्त, छठा 14 अगस्त,  सातवां 21 अगस्त, आठवीं 28 अगस्त को पड़ेगी.

    देवघर के बाबा मंदिर में कावड़ लेकर भक्तों की भीड़ उमड़नी शुरू

    इसके साथ ही देवघर के बाबा मंदिर में कावड़ लेकर भक्तों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई है. लेकिन आप लोगों के मन में हमेशा ये ख्याल आता होगा कि आखिर पूरे 1 महीने तक भगवान शिव को जलार्पण करने भक्त देवघर क्यों जाते हैं. आखिर क्यों सावन महीना भगवान शिव को इतना प्रिय है.. तो आज हम आपको सावन के पूरे महीने के सृजन की पूरी कहानी बताएंगे.

    जानें क्यों किया गया सावन महीने का सृजन

    जैसे कि हम सभी को पता है कि भगवान भोलेनाथ तीनों त्रिलोक के मालिक हैं. वो किसी को भी कष्ट में नहीं देख सकते हैं. चाहे वो भक्त हो या फिर कोई देवी देवता. समुद्र मंथन के बारे में तो सभी को पता होगा कि समुद्र मंथन में अमृत के साथ हलाहल विष भी निकाला था. अमृत के लिए तो देवी देवता में काफी संघर्ष हुआ. और वो बांट लिया गया. लेकिन जब हलाहल विष बांटने की बारी आई तो देवी और देवता सभी पीछे हट गये. 

    हलाहल बिष के प्रकोप से नीला पड़ गया था भोलेनाथ का कंठ

    आपको बताये कि हलाहल विष इतना खतरनाक था कि उसकी एक बूंद से पूरे सृष्टि का सर्वनाश हो सकता था. इसलिए उसे कहीं फेंका भी नहीं जा सकता था. ऐसे में सभी देवी-देवताओं ने ये फैसला लिया कि अब भगवान भोलेनाथ से ही इसका समाधान पूछा जाए. तब भगवान भोलेनाथ ने सभी देवताओं से कहा कि आप लोगों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. मैं इस हलाहल विष को ग्रहण कर लूंगा. जिसके बाद भगवान भोलेनाथ ने उस पूरे हलाहल विष को एक घूंट में ही गटक लिया.

    इस तरह नीलकंठ पड़ा नाम

    जैसे ही भगवान भोलेनाथ ने हलाहल विष को पीना शुरू किया. इसके प्रकोप से भगवान शिव का शरीर और कंठ नीला पड़ने लगा. जिसकी वजह से भोले बाबा को नीलकंठ भी कहा जाता है. बिष के ताप से भगवान भोलेनाथ की आखें लाल हो गई. उसके ताप को बर्दाश्त मुश्किल होता देख. देवताओं ने उनके कंठ में सांपों की माला पहनाई. क्योंकि सांपों की प्रवृत्ति ठंड होती है. उसके साथ ही चंदा को उनके माथे पर लगाया गया. 

    इस वजह से चढ़ाई जाती है ये नशीली चीजें

    वहीं सबके मन में ये सवाल रहता है कि बाबा भोलेनाथ को भांग धतूरा, गांजा क्यों चढ़ाया जाता है. तो हम आपको बता दें कि ये सारी ठंडी प्रवृति की चीजें है. इससे भगवान शिव को हलाहल विष के प्रकोप से राहत मिली थी. यही वजह है कि भक्त आज भी उन्हें ये सारी चीजें चढ़ाते हैं.ताकि उन्हें उससे ठंडक मिले.

    जानें क्यों देवघर जाते है भक्त

    इसके साथ ही सभी देवी-देवताओं ने मिलकर पूरे एक महीने सावन महीने का सृजन किया. ताकि पूरे महीने बारिश हो और बारिश से भगवान भोलेनाथ को थोड़ी राहत मिले. यही वजह है कि सावन महीने में भगवान भोलेनाथ को जलार्पण किया जाता है. और भक्त भगवान भोलेनाथ को जल चढ़ाने के लिए देवघर के बाबा मंदिर जाते हैं.



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