अद्भुत! वनवास के दौरान पांडवों ने करवायी थी माता के इस मंदिर की स्थापना, लेकिन आज तक नहीं बन पाया छत

    अद्भुत! वनवास के दौरान पांडवों ने करवायी थी माता के इस मंदिर की स्थापना, लेकिन आज तक नहीं बन पाया छत

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK):हिंदू धर्म में 33 करोड़ देवी देवता है.जिनसे हम सभी सनातनियों की आस्था है, वहीं बात अगर हिंदू मंदिरों की करे तो देश में ऐसे सैकड़ों मंदिर हैं, जिनका अपना ऐतिहासिक महत्व है  जिसको सुनकर आज भी हम हैरान रह जाते है. आज हम आपको एक ऐसे ही माता दुर्गा के चमत्कारिक मंदिर के बारे में बताने वाले है.जहां से करोडो लोगों की आस्था जुड़ी हुई है लेकिन सबसे चौंकाने  वाली बात यह है कि आज तक इस मंदिर की छत नहीं बन पाई है.ऐसा नहीं है कि किसी ने इस मंदिर की छत बनवाने की कोशिश नहीं की है बल्कि कई बार इसे बनाने के लिए मिस्त्री को लाया गया.कभी-कभी तो छत बनकर तैयार भी हो गया लेकिन हल्की सी आंधी में छत गिर जाता है वही इससे जुड़े कई ऐसी अदभुत पौराणिक कथाएं है जिससे आज हम आपको रूबरू करवाने वाले है.

    माता दुर्गा का अलौकिक और अनोखा मंदिर

    आपको बता दे कि माता दुर्गा का ये अलौकिक और अनोखा मंदिर हिमाचल प्रदेश में स्थित है जो माता शिकारी देवी के नाम से काफी ज्यादा प्रसिद्ध है.जानकार बताते है कि यह मंदिर महाभारत काल का है जिसकी स्थापना पांडवों ने वनवास के दौरान किया था. मंदिर की खास बात है कि ये खुले आसमान के नीचे है इसके ऊपर कोई भी छत नहीं है.रोज़ाना सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर में पहुँचते है और अपनी अपनी मनोकामना माँगते है ऐसा माना जाता है कि माता शिकारी देवी सभी की मनोकामनाएँ पूर्ण करती है.

    पढे क्यों कहते है शिकारी देवी 

    शिकारी देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित है.माता शिकारी देवी मंदिर में ऋषि मारकंडे ने कई वर्षों तक ध्यान किया था, जिसके बाद माता दुर्गा उनसे प्रसन्न होकर यहां प्रकट हुई थी.लेकिन आज तक मंदिर माता का निर्माण नहीं हो पाया.जिसके पीछे की वजह काफी परेशान करने वाली है.कहा जाता है कि मंदिर में शिकारी अपने शिकार से पहले देवी की पूजा करते थे ताकि उन्हें शिकार में सफलता मिले माता उन्हें जंगली जानवरों से रक्षा करती थी यही वजह है कि माता देवी को शिकारी देवी के नाम से पुकारा जाने लगा.

    हल्की आँधी से भी उड़ जाता है छत

    देश में जितने भी मंदिर है इनमें सभी से हटकर माता शिकारी देवी का मंदिर है क्योंकि यहां खुले आसमान के नीचे माता का मूर्ति रखा हुआ है. उसके ऊपर कोई भी छत्र नहीं है. श्रद्धालुओ ने कई बार मंदिर बनाने की कोशिश की लेकिन हल्की सी आंधी तूफ़ान में यह गिर जाता है लोग मानते है कि शिकारी देवी खुले आसमान के नीचे रहना चाहती है. इस लिये मंदिर का निर्माण नहीं हो पाता है वही होता भी है तो छत टूट जाती है.

    नवरात्र के दौरान मंदिर की रौनक अलग लगती है

    वैसे तो रोजाना यहां से  भक्तों की भीड़ लगती है लेकिन नवरात्र के दौरान यहां की रौनक अलग होती है,यहां रोजाना भारी संख्या में श्रद्धालु आते है मान्यता है कि जो भी शिकारी देवी की पूजा सच्ची श्रद्धा निष्ठा से करता है उसके सारे कष्टों को माता शिकारी देवी हर लेती है.


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