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आखिर भारत को ‘Thank You’ क्यों कह रहे नेपाल के PM बालेन शाह? मुश्किल वक्त में भारत ने ऐसे बढ़ाया मदद का हाथ

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने दुनिया के सबसे बड़े मंच से भारत को ‘थैंक यू’ कहा है. संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UNGA में बोलते हुए बालेन शाह ने हाल में नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का जिक्र किया और मुश्किल समय में मदद के लिए भारत का आभार जताया. लेकिन सवाल है कि आखिर भारत ने ऐसा क्या किया, जिसके लिए नेपाल के प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र तक में उसका जिक्र किया?

दरअसल अगस्त में नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी. इस मुश्किल समय में भारत उन देशों में शामिल था, जिन्होंने नेपाल तक तेजी से राहत सामग्री और बचाव से जुड़ी मदद पहुंचाई.

UN में बालेन शाह ने भारत को कहा थैंक यू

बालेन शाह ने 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आपदा के समय पड़ोसी देशों भारत और चीन ने नेपाल की मदद की.

बालेन शाह इससे पहले नेपाल की संसद में भी भारत की मदद के लिए आभार जता चुके हैं. यानी यह पहला मौका नहीं है जब उन्होंने भारत को धन्यवाद कहा है.

बाढ़ के बाद भारत ने तुरंत बढ़ाया मदद का हाथ

26 अगस्त को नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बालेन शाह से फोन पर बात की थी. भारत ने नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने की बात कही और इसके कुछ ही घंटों बाद राहत सामग्री भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई.

भारत की तरफ से कई खेप में खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरी चीजों के साथ दवाइयां और दूसरी राहत सामग्री नेपाल भेजी गई.

सितंबर की शुरुआत तक भारत करीब 68.5 टन राहत सामग्री नेपाल पहुंचा चुका था. इसके बाद भी मदद जारी रही. भारत ने पांचवीं खेप में 5.5 टन जरूरी दवाइयों के साथ 11 सदस्यों की एक विशेष रेस्क्यू टीम भी नेपाल भेजी.

सिर्फ सामान नहीं, डॉक्टर और रेस्क्यू टीम भी भेजी

भारत की मदद केवल राहत सामग्री तक सीमित नहीं रही. डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीम भी नेपाल भेजी गई. इसके अलावा तकनीकी विशेषज्ञों ने मुश्किल इलाकों में चल रहे बचाव अभियान में मदद की.

बाढ़ से नेपाल के कई इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए थे. सड़क, पुल और बिजली से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी नुकसान पहुंचा. कई लोग लापता हुए और राहत-बचाव अभियान लंबे समय तक चलता रहा.

इसी दौरान भारत की तरफ से विशेष उपकरणों के साथ रेस्क्यू टीम भेजी गई, ताकि मुश्किल इलाकों में फंसे लोगों को खोजने और राहत पहुंचाने में मदद मिल सके.

नेपाल को 95 टन तक पहुंची मानवीय मदद

सितंबर के तीसरे सप्ताह तक भारत की तरफ से नेपाल को दी गई मानवीय सहायता करीब 95 टन तक पहुंच चुकी थी. इसमें आपदा राहत से जुड़ा सामान भी शामिल था. भारत ने क्षतिग्रस्त संपर्क व्यवस्था को दोबारा शुरू करने में मदद के लिए बेली ब्रिज जैसी सहायता भी उपलब्ध कराई.

नेपाल में बिजली उत्पादन को हुए नुकसान के बीच दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग भी चर्चा में रहा. भारत ने नेपाल को बिजली उपलब्ध कराने पर सहमति जताई, ताकि आपदा के बाद पैदा हुई बिजली की कमी से निपटने में मदद मिल सके.

अब हिमालय को बचाने के लिए दिया बड़ा प्रस्ताव

भारत को धन्यवाद देने के साथ बालेन शाह ने UN के मंच से जलवायु परिवर्तन का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने हिमालयी क्षेत्रों पर बढ़ते खतरे की बात करते हुए एक ‘हिमालयन क्लाइमेट रेजिलिएंस मैकेनिज्म’ बनाने का प्रस्ताव रखा.उनका कहना था कि हिमालयी देशों को जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाली आपदाओं से निपटने के लिए मिलकर काम करना होगा.यानी बालेन शाह का भारत को ‘थैंक यू’ कहना केवल कूटनीतिक औपचारिकता तक सीमित नहीं था. इसके पीछे बाढ़ के बाद राहत सामग्री, दवाइयों, डॉक्टरों, तकनीकी विशेषज्ञों और रेस्क्यू टीम के रूप में भारत की ओर से दी गई मदद भी थी.