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क्या है हाइपरसोनिक मिसाइल, जिसका नॉर्थ कोरिया ने किया है परीक्षण, जानिए

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): नॉर्थ कोरिया ने एक बार फिर अपनी मिसाइल ताकत दुनिया के सामने दिखाई है. उसने एक नए हथियार सिस्टम का परीक्षण किया, जिसे हाइपरसोनिक तकनीक से जोड़कर देखा जा रहा है. सामने आई तस्वीरों में ह्वासोंग-11Ma-1 नाम दिखाई दिया है. इसके बाद एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि आखिर हाइपरसोनिक मिसाइल क्या होती है और इसे रोकना सामान्य मिसाइल के मुकाबले इतना मुश्किल क्यों माना जाता है.

क्या होती है हाइपरसोनिक मिसाइल?

आसान भाषा में समझें तो ऐसी मिसाइल या हथियार जो आवाज की रफ्तार से कम से कम पांच गुना यानी Mach 5 या उससे ज्यादा तेजी से उड़ सके, उसे हाइपरसोनिक कहा जाता है.

लेकिन सिर्फ तेज रफ्तार ही इसकी खासियत नहीं है. हाइपरसोनिक हथियार का बड़ा फायदा उड़ान के दौरान रास्ता बदलने की क्षमता हो सकती है. बैलिस्टिक मिसाइल आम तौर पर एक अनुमान लगाने योग्य रास्ते पर आगे बढ़ती है. इसके उलट हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल वायुमंडल में तेज रफ्तार से आगे बढ़ते हुए अपना रास्ता बदल सकता है.

इस वजह से रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए यह अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है कि हथियार आखिर किस जगह को निशाना बनाने जा रहा है.

कैसे काम करता है हाइपरसोनिक हथियार?

हाइपरसोनिक हथियारों को मोटे तौर पर दो तरह से समझा जा सकता है. पहला हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल यानी HGV और दूसरा हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल.

HGV को पहले रॉकेट के जरिए काफी ऊंचाई और रफ्तार तक पहुंचाया जाता है. इसके बाद ग्लाइड व्हीकल अलग होकर वायुमंडल में अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ता है और रास्ते में दिशा भी बदल सकता है.

हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल अलग तरीके से काम करती है. इसमें आम तौर पर ऐसे इंजन की जरूरत होती है, जो बहुत तेज रफ्तार पर भी मिसाइल को आगे बढ़ाता रहे.

नॉर्थ कोरिया ने क्या टेस्ट किया?

नॉर्थ कोरिया की सरकारी मीडिया KCNA ने नए हथियार सिस्टम के परीक्षण की तस्वीरें जारी की हैं. इनमें ट्रक से मिसाइल लॉन्च होते हुए दिखाई देती है. तस्वीरों में किम जोंग उन अपनी बेटी के साथ परीक्षण देखते नजर आए.

एक मॉनिटर पर ह्वासोंग-11Ma-1 की फ्लाइट ट्रैजेक्टरी लिखी दिखाई दी. इसी वजह से इसे हाइपरसोनिक क्षमता वाली कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का नया रूप माना जा रहा है. हालांकि नॉर्थ कोरिया ने अपनी आधिकारिक घोषणा में हथियार का पूरा तकनीकी विवरण सार्वजनिक नहीं किया.

किम जोंग उन ने इस परीक्षण को देश की युद्ध क्षमता मजबूत करने वाला कदम बताया और दावा किया कि नया हथियार दुश्मनों के लिए बड़ी परेशानी पैदा करेगा.

3 घंटे के अंतर पर दागी गईं दो मिसाइलें

साउथ कोरिया की सेना के मुताबिक नॉर्थ कोरिया ने वॉनसान इलाके से करीब तीन घंटे के अंतर पर दो कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें लॉन्च कीं. पहली मिसाइल ने करीब 450 किलोमीटर और दूसरी ने 600 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय की.

जापान के मुताबिक दोनों मिसाइलें समुद्र में गिरीं और जापान के Exclusive Economic Zone यानी EEZ के बाहर रहीं.

नॉर्थ कोरिया के दावे पर क्यों उठ रहे सवाल?

दिलचस्प बात यह है कि नॉर्थ कोरिया की तरफ से दिखाई गई जानकारी और साउथ कोरिया के आकलन में बड़ा अंतर है.

नॉर्थ कोरिया की ओर से जारी तस्वीर में मॉनिटर पर 2,146 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार और 908.2 किलोमीटर की दूरी दिखाई देती है. वहीं साउथ कोरिया ने दोनों मिसाइलों की उड़ान लगभग 450 और 600 किलोमीटर से ज्यादा आंकी है.

इसी अंतर के कारण नॉर्थ कोरिया के आंकड़ों को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि स्वतंत्र तकनीकी जांच के बिना प्योंगयांग के सभी दावों की पुष्टि करना मुश्किल है.

क्यों बढ़ रही नॉर्थ कोरिया की मिसाइल ताकत?

नॉर्थ कोरिया पिछले कई वर्षों से अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. उसके पास कम दूरी की मिसाइलों से लेकर लंबी दूरी की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी ICBM तक मौजूद हैं.

SIPRI Yearbook 2026 के अनुमान के मुताबिक नॉर्थ कोरिया ने करीब 60 परमाणु हथियार तैयार किए हो सकते हैं. उसके पास कम से कम 30 और परमाणु हथियार बनाने लायक फिसाइल मैटेरियल होने का अनुमान है.

यही वजह है कि हाइपरसोनिक तकनीक पर नॉर्थ कोरिया का काम सिर्फ तेज रफ्तार वाली एक और मिसाइल तैयार करने तक सीमित नहीं माना जा रहा. अगर प्योंगयांग ऐसी मिसाइल को भरोसेमंद तरीके से नियंत्रित करने और दिशा बदलने में सक्षम बनाता है, तो क्षेत्र में मौजूद मिसाइल डिफेंस सिस्टम के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है.