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कोलंबो में अमेरिकी ताकत की दस्तक, भारत के लिए कितनी बड़ी है ये खबर?

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

टीएनपी(TNP): इंडियन ओशन में बढ़ती रणनीतिक हलचल के बीच अमेरिका ने श्रीलंका के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है. इसी सिलसिले में अमेरिका के दो अधिकारी तीन दिन के दौरे पर श्रीलंका पहुंचे हैं. इनमें पैसिफिक एयर फोर्सेज के कमांडर जनरल केविन श्नाइडर और साउथ एण्ड सेंट्रल एशियाई मामलों के लिए सहायक विदेश मंत्री एस पॉल कपूर शामिल हैं.

दोनों अधिकारियों की यात्रा को काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह ऐसे समय में हो रही है जब हिंद महासागर दुनिया की बड़ी शक्तियों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद जरूरी बन चुका है.

सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर रहेगा फोकस

जनरल केविन श्नाइडर अपने दौरे के दौरान श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय और सैन्य अधिकारियों के साथ कई अहम बैठकें करेंगे. इन बैठकों में समुद्री सुरक्षा, हवाई निगरानी, साइबर सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है.

अमेरिका चाहता है कि क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए श्रीलंका के साथ सहयोग बढ़ाया जाए. पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में साझेदारी बढ़ी है और कई संयुक्त गतिविधियां भी आयोजित की गई हैं.

व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भी होगी चर्चा

वहीं सहायक विदेश मंत्री एस पॉल कपूर का फोकस इकनॉमिक और राजनीतिक सहयोग पर रहेगा. वह श्रीलंका के बड़े नेताओं, सरकारी अधिकारियों और कारोबारी प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे.

इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने के नए अवसरों पर चर्चा की जाएगी. अमेरिका की कोशिश है कि आर्थिक क्षेत्र में भी श्रीलंका के साथ उसके संबंध और मजबूत हों. इससे दोनों देशों को निवेश और रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं.

हिंद महासागर क्यों है इतना महत्वपूर्ण

हिंद महासागर दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बीच होने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. श्रीलंका की भौगोलिक स्थिति इस क्षेत्र को और अधिक महत्वपूर्ण बना देती है.

यही वजह है कि कई बड़े देश इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी और प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में चीन ने भी श्रीलंका में कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में निवेश किया है. ऐसे में अमेरिका भी अपने संबंधों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है.

भारत पर क्या पड़ सकता है असर

भारत के लिए भी यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. श्रीलंका भारत का करीबी समुद्री पड़ोसी है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से सांस्कृतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध रहे हैं.

अमेरिका और श्रीलंका के बीच बढ़ता सहयोग भारत के लिए कुछ मामलों में पाज़िटिव साबित हो सकता है, खासकर समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से. हालांकि भारत इस बात पर भी नजर रखेगा कि हिंद महासागर में किसी एक देश का प्रभाव जरूरत से ज्यादा न बढ़े.

आने वाले समय में भारत, अमेरिका और श्रीलंका के बीच सहयोग बढ़ सकता है. वहीं क्षेत्र में चीन की मौजूदगी को देखते हुए रणनीतिक कंपीटीसीऑन भी जारी रहने की संभावना है. इसलिए यह दौरा सिर्फ श्रीलंका और अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्रभाव पूरे हिंद महासागर क्षेत्र और भारत की रणनीतिक सोच पर भी दिखाई दे सकते हैं.