International

ईरानी ड्रोन से बचने के लिए UAE ने लगाया 'ड्रोन केज', जानिए यूक्रेन वाला तरीका कैसे करेगा सुरक्षा?

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

टिएनपी डेस्क (TNP DESK): ईरान की तरफ से होने वाले ड्रोन हमलों से बचने के लिए यूएई ने सुरक्षा का नया तरीका अपनाया है. यूएई अब अपने जरूरी और संवेदनशील ठिकानों के आसपास लोहे और जाली से बने बड़े-बड़े ढांचे लगा रहा है. इन्हें 'ड्रोन केज' कहा जाता है. आसान भाषा में समझें तो ये किसी बड़े पिंजरे की तरह होते हैं, जो ड्रोन को सीधे इमारत से टकराने से रोकने में मदद करते हैं.

इस तरह की सुरक्षा का इस्तेमाल यूक्रेन भी कर चुका है. रूस के साथ युद्ध के दौरान लगातार होने वाले ड्रोन हमलों से अपने जरूरी ठिकानों को बचाने के लिए यूक्रेन ने कई जगह ऐसे जालीदार ढांचे लगाए थे. अब यूएई भी उसी तरीके को अपना रहा है.

आखिर क्या होता है ड्रोन केज

ड्रोन केज को समझना काफी आसान है. किसी जरूरी इमारत या ठिकाने के चारों तरफ मजबूत लोहे की जाली लगा दी जाती है. अगर कोई ड्रोन सीधे उस जगह पर हमला करने के लिए आता है, तो वह इमारत तक पहुंचने से पहले इस जाली से टकरा सकता है.

इससे ड्रोन के सीधे हमले से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ड्रोन केज हर तरह के हमले से पूरी सुरक्षा दे सकता है. इसे सुरक्षा की एक अतिरिक्त दीवार की तरह देखा जा रहा है.

यूक्रेन से आया यह आइडिया

रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन का जमकर इस्तेमाल हुआ है. छोटे ड्रोन से लेकर विस्फोटक लेकर उड़ने वाले ड्रोन तक युद्ध में इस्तेमाल किए गए हैं. ऐसे में यूक्रेन ने अपने कई जरूरी ठिकानों को बचाने के लिए उनके ऊपर और आसपास लोहे की जालियां लगानी शुरू की थीं.

यूएई ने भी इसी मॉडल को अपनाया है. तस्वीरों में बड़े ठिकानों के चारों तरफ जालीदार ढांचा साफ दिखाई दे रहा है.

हजारों ड्रोन और मिसाइलों का किया सामना

ईरान के साथ संघर्ष के दौरान यूएई ने 2,265 ड्रोन और 551 बैलिस्टिक मिसाइलों का सामना किया. ऐसे हमलों के खतरे को देखते हुए यूएई अपने महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा को और मजबूत करने में जुटा है.

खास तौर पर उन जगहों पर ध्यान दिया जा रहा है, जहां ड्रोन के हमले से बड़ा नुकसान हो सकता है.

ड्रोन ने बदल दिया लड़ाई का तरीका

आज के समय में ड्रोन किसी भी युद्ध में बड़ा हथियार बनते जा रहे हैं. इन्हें दूर से उड़ाया जा सकता है और ये कम ऊंचाई पर जाकर किसी खास जगह को निशाना बना सकते हैं. कई ड्रोन आकार में छोटे होते हैं, इसलिए समय रहते उनका पता लगाना भी मुश्किल हो सकता है.

यही वजह है कि अब देश मिसाइल डिफेंस और दूसरे आधुनिक हथियारों के साथ-साथ ऐसे आसान तरीकों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं.

यूएई का 'ड्रोन केज' भी इसी रणनीति का हिस्सा है. यूएई की कोशिश है कि अगर कोई दुश्मन ड्रोन उसके जरूरी ठिकानों की तरफ आए, तो वह सीधे अपने निशाने तक न पहुंच सके और नुकसान को कम किया जा सके.