टीनपी डेस्क (TNP DESK): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पेट्रोल बेचने वाली कंपनियों से तुरंत ईंधन की कीमतें घटाने की अपील करते हुए कहा कि कच्चे तेल की कीमत घटकर 68 डॉलर प्रति बैरल रह गई है, लेकिन इसका लाभ आम उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच रहा है. ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि लोग अब भी जरूरत से ज्यादा कीमत चुका रहे हैं, जबकि वैश्विक बाजार में तेल सस्ता हो चुका है. उन्होंने कंपनियों से पेट्रोल की कीमत करीब 2.50 डॉलर प्रति गैलन तक लाने की मांग की और चेतावनी दी कि ग्राहकों से अधिक कीमत वसूलना गैरकानूनी है. उन्होंने कहा कि यदि जल्द कीमतें नहीं घटाई गईं तो कंपनियों को गंभीर कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. इससे पहले भी ट्रम्प अमेरिकी न्याय विभाग को बड़ी तेल कंपनियों की जांच के निर्देश दे चुके हैं.
इधर पश्चिम एशिया में हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं. अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच हालिया तनाव के बाद भले ही कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई हो, लेकिन वैश्विक ऊर्जा बाजार पर अनिश्चितता बनी हुई है. समुद्री ट्रैकिंग कंपनी के आंकड़ों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों की संख्या में कमी दर्ज की गई है. वहीं ईरान और ओमान ने मस्कट में संयुक्त होर्मुज समिति की पहली बैठक कर समुद्री मार्ग के संचालन और सुरक्षा पर चर्चा की. दूसरी ओर कतर ने बताया कि अमेरिकी दूत दोहा पहुंचे हैं, लेकिन उनकी ईरानी अधिकारियों से प्रत्यक्ष वार्ता नहीं होगी. साथ ही कतर ने स्पष्ट किया कि वहां जमा ईरान के 6 अरब डॉलर अब तक जारी नहीं किए गए हैं.
इसी बीच ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत के प्रतिनिधित्व को लेकर भी बहस तेज हो गई है. भारत ने प्रधानमंत्री के बजाय विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को प्रतिनिधिमंडल में शामिल करने का फैसला किया है. कुछ विशेषज्ञ इसे अमेरिका और इजराइल के साथ भारत के मजबूत होते संबंधों के संदर्भ में देख रहे हैं, जबकि अन्य का मानना है कि यह भारत की पारंपरिक कूटनीतिक नीति के अनुरूप है. इस बीच अमेरिकी प्रशासन के भीतर विदेश नीति को लेकर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अलग-अलग बयानों ने भी नई अटकलों को जन्म दिया है.
