टीएनपी डेस्क(TNP DESK): मिडील ईस्ट में बढ़ते तनाव और लगातार बढ़ रही सैन्य गतिविधियों के बीच अमेरिका और ईरान ने एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमति जताई है. दोनों देशों के नेताओं द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर किए जाने के बाद यह प्रारंभिक समझौता लागू हो गया. इसे हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहलों में से एक माना जा रहा है. इस समझौते का मकसद सिर्फ मौजूदा तनाव को कम करना नहीं, बल्कि भविष्य में एक व्यापक और स्थायी समझौते का रास्ता तैयार करना भी है.
समझौते के तहत कुल 14 प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी है. सबसे पहले दोनों देशों ने सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाइयों को रोकने और क्षेत्रीय संघर्ष को कम करने का फैसला किया है. इसके अलावा दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता, सीमाओं और आंतरिक मामलों का सम्मान करेंगे तथा किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप से बचेंगे.
समझौते का तीसरा अहम बिंदु यह है कि अमेरिका और ईरान अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम और व्यापक समझौते तक पहुंचने का प्रयास करेंगे. इस दौरान दोनों पक्ष ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे जिससे वार्ता प्रभावित हो. चौथे बिंदु के तहत अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा, जबकि पांचवें बिंदु में होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर सहमति बनी है.
छठे बिंदु में ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए लगभग 300 अरब डॉलर के संभावित निवेश और सहायता ढांचे की बात कही गई है. सातवें बिंदु के अनुसार अंतिम समझौते के बाद ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा सकता है. वहीं आठवें बिंदु में ईरान ने दोबारा भरोसा दिलाया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और अपने परमाणु कार्यक्रम को निगरानी के दायरे में रखने पर चर्चा जारी रखेगा.
नौवें बिंदु के तहत दोनों देश अंतिम समझौता होने तक मौजूदा स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेंगे. दसवें बिंदु में ईरानी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को राहत देने की बात कही गई है ताकि ईरान की अर्थव्यवस्था को तत्काल सहायता मिल सके. ग्यारहवें बिंदु के अनुसार प्रतिबंधों के कारण फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों और धनराशि तक पहुंच बहाल करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
बारहवें बिंदु में दोनों देशों द्वारा एक संयुक्त निगरानी तंत्र बनाने पर सहमति बनी है, जो समझौते के पालन की निगरानी करेगा. तेरहवें बिंदु के तहत सभी मुद्दों पर एक साथ नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से बातचीत आगे बढ़ाई जाएगी. वहीं चौदहवें और अंतिम बिंदु में यह प्रावधान रखा गया है कि भविष्य में होने वाले अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मंजूरी दिलाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि उसे अंतरराष्ट्रीय कानूनी मान्यता मिल सके.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल अमेरिका और ईरान के बीच संबंध सुधारने तक सीमित नहीं है. इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार, मध्य पूर्व की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय परमाणु नीति पर भी पड़ सकता है. यदि दोनों देश निर्धारित समय सीमा के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंच जाते हैं, तो यह हाल के दशकों की सबसे बड़ी कूटनीतिक उपलब्धियों में से एक साबित हो सकता है. हालांकि अभी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत बातचीत बाकी है, लेकिन फिलहाल यह समझौता संघर्ष से संवाद की ओर बढ़ते एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है.
