टिएनपी डेस्क (TNP DESK): अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन जन्म से मिलने वाली नागरिकता यानी बर्थराइट सिटिजनशिप के नियमों को और सख्त करने की तैयारी में है. अमेरिकी सरकार बच्चों के पासपोर्ट के आवेदन की प्रक्रिया में ऐसा बदलाव करने पर विचार कर रही है, जिसके तहत माता-पिता को अपनी नागरिकता या इमीग्रेशन स्टेटस का सबूत भी देना पड़ सकता है.
इस प्रस्ताव को ट्रंप के उस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर को लागू करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिसका मकसद बर्थ टूरिज्म पर रोक लगाना और अमेरिका में जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता के मौजूदा नियमों में बदलाव करना है.
अभी क्या नियम है और नया क्या होगा?
मौजूदा व्यवस्था में अमेरिका में बच्चे का पासपोर्ट बनवाते समय माता-पिता को मुख्य रूप से बच्चे के साथ अपने रिश्ते और बच्चे की पहचान से जुड़े जरूरी दस्तावेज देने होते हैं. माता-पिता को आवेदन में अपनी नागरिकता या स्टेटस की जानकारी देनी होती है, लेकिन हर मामले में उसका अलग से इमीग्रेशन प्रूफ देना जरूरी नहीं है.
प्रस्तावित बदलाव के बाद स्थिति अलग हो सकती है. नए ड्राफ्ट के मुताबिक, बच्चे के पासपोर्ट के लिए आवेदन करते समय माता-पिता या कानूनी अभिभावक को अपनी नागरिकता या अमेरिका में रहने के कानूनी अधिकार से जुड़े दस्तावेज देने पड़ सकते हैं.
इन दस्तावेजों में वीजा, आई-94 फॉर्म या ग्रीन कार्ड जैसे कागजात शामिल हो सकते हैं.
सरकार आखिर ऐसा क्यों करना चाहती है?
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस बदलाव का मकसद नागरिकता के नियमों को स्पष्ट करना और उन मामलों पर रोक लगाना है, जिन्हें सरकार बर्थ टूरिज्म से जोड़ती है.
प्रस्ताव के तहत कुछ खास परिस्थितियों में अमेरिका में जन्मे बच्चों की नागरिकता को लेकर सवाल उठाया जा सकता है. इनमें ऐसे मामले शामिल हैं, जहां माता-पिता में से कोई किसी विदेशी सरकार के लिए काम कर रहा हो या नागरिकता हासिल करने के लिए धोखाधड़ी या किसी तरह की व्यावसायिक व्यवस्था का सहारा लिया गया हो.
यानी सरकार अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बच्चे के जन्म के समय माता-पिता की कानूनी स्थिति क्या थी.
क्या इसे लागू करना आसान होगा?
हालांकि इस प्रस्ताव को लागू करना ट्रंप प्रशासन के लिए आसान नहीं होगा. इसकी वजह है अमेरिकी संविधान और जन्मजात नागरिकता को लेकर पहले से मौजूद कानूनी प्रावधान.
ट्रंप प्रशासन के इस कदम के खिलाफ नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों और वकीलों ने अदालत का रुख किया है. उनका तर्क है कि सरकार जन्म के आधार पर मिलने वाले नागरिकता के अधिकार को इस तरह सीमित नहीं कर सकती.
मैरीलैंड में हुई एक सुनवाई के दौरान डिस्ट्रिक्ट जज डेबोरा बोर्डमैन ने भी इस आदेश को लेकर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने इसे अभूतपूर्व कदम बताया.
वहीं, अमेरिकी न्याय विभाग का कहना है कि अभी इस मामले में जल्दबाजी में रोक लगाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से इसके लागू होने को लेकर पूरी सार्वजनिक गाइडलाइन सामने नहीं आई है.