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ईरान का NATO पर बड़ा हमला, अमेरिका-इजराइल का साथ देने वालों से मांगा जवाब

Saumya Shukla
Senior News Publisher • TheNewsPost.in
ईरान का NATO पर बड़ा हमला, अमेरिका-इजराइल का साथ देने वालों से मांगा जवाब

टीएनपी(TNP): मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की बजाय लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है. ईरान अब सिर्फ अमेरिका और इजराइल पर ही नहीं, बल्कि उनके साथ खड़े देशों पर भी सवाल उठा रहा है. ईरान का कहना है कि अगर किसी देश ने उसके खिलाफ हुई सैन्य कार्रवाई में मदद की है, तो उसे पूरी दुनिया के सामने अपनी भूमिका साफ करनी चाहिए.

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि कुछ NATO सदस्य देशों ने अमेरिका का साथ दिया था. उनका आरोप है कि अगर यह सच है तो उन देशों को यह बताना चाहिए कि उन्होंने आखिर किस आधार पर ईरान के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन किया. ईरान का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी सिर्फ दो देशों की नहीं, बल्कि उनके सहयोगियों की भी बनती है.

दूसरी तरफ होर्मुज स्ट्रेट में एक नई घटना ने चिंता और बढ़ा दी है. ओमान के तट के पास एक मालवाहक जहाज किसी अज्ञात हथियार की चपेट में आ गया. टक्कर के बाद जहाज के उस हिस्से को नुकसान पहुंचा जहां से पूरे जहाज का संचालन किया जाता है. अच्छी बात यह रही कि इस घटना में किसी की जान नहीं गई और चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं. हालांकि हमले के पीछे कौन है, इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है.

समुद्री सुरक्षा को लेकर भी ईरान और पश्चिमी देशों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं. संयुक्त राष्ट्र ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए नया समुद्री रास्ता बनाने का सुझाव दिया था, लेकिन ईरान ने इसे मानने से इनकार कर दिया. ईरान का कहना है कि उसके समुद्री क्षेत्र से जुड़े किसी भी फैसले में उसकी सहमति जरूरी है. वहीं अमेरिका ने साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर किसी एक देश का दबदबा स्वीकार नहीं किया जाएगा.

उधर अमेरिका में रक्षा तैयारियों को लेकर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने संसद से अरबों डॉलर की अतिरिक्त राशि मांगी है. सरकार का कहना है कि यह पैसा सेना की तैयारियों, हथियारों की खरीद और भविष्य की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने में खर्च किया जाएगा.

कुल मिलाकर मिडिल ईस्ट में हालात अभी भी बेहद नाजुक बने हुए हैं. एक तरफ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, तो दूसरी तरफ समुद्र और सीमाओं पर बढ़ती गतिविधियां दुनिया की चिंता बढ़ा रही हैं. आने वाले दिनों में इस पूरे क्षेत्र पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी.