टीएनपी डेस्क(TNP DESK): ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत भी शामिल होगा. इस समारोह में भारत सरकार की ओर से एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेगा. बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. दोनों नेता ईरान पहुंचकर अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और वहां आयोजित राजकीय कार्यक्रम में शामिल होंगे.
समाचार एजेंसी एएनआई ने ईरानी सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान सरकार ने भारत को आधिकारिक तौर पर इस समारोह में शामिल होने का निमंत्रण भेजा था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी राजकीय अंतिम संस्कार और दफन समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था. इसके बाद भारत सरकार ने उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला लिया. इस कदम को दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक और मित्रतापूर्ण संबंधों के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
ईरान सरकार ने अयातुल्ला अली खामेनेई के सम्मान में एक सप्ताह का राजकीय शोक कार्यक्रम घोषित किया है. यह कार्यक्रम 4 जुलाई से 9 जुलाई तक चलेगा. इस दौरान देशभर में कई धार्मिक और सरकारी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. ईरानी अधिकारियों के अनुसार खामेनेई का पार्थिव शरीर 4 और 5 जुलाई को तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में आम लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा. बड़ी संख्या में लोगों के वहां पहुंचने की संभावना जताई जा रही है.
6 जुलाई को तेहरान में राजकीय अंतिम संस्कार जुलूस निकाला जाएगा. इस दौरान देश और विदेश से आए नेता, अधिकारी और धार्मिक हस्तियां शामिल होंगी. इसके बाद पूरे सम्मान के साथ उनका दफन किया जाएगा. ईरान सरकार ने अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. साथ ही तेहरान प्रांत में आधिकारिक शोक अवधि के दौरान सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया गया है.
ईरान के कई बड़े शहरों में 4 जुलाई से 9 जुलाई तक श्रद्धांजलि सभाएं और स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. सरकार का कहना है कि इन कार्यक्रमों में दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा लाखों ईरानी नागरिकों के भी अंतिम विदाई कार्यक्रम में पहुंचने की उम्मीद है. इस वजह से पूरे देश में सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं.
गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को ईरान की राजधानी तेहरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के दौरान अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद पूरे ईरान में शोक की लहर फैल गई थी. खामेनेई कई दशकों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे और देश की राजनीति, विदेश नीति और धार्मिक मामलों में उनकी अहम भूमिका रही. उनकी मृत्यु के बाद ईरान में बड़े राजनीतिक और धार्मिक बदलावों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है.
भारत का इस राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होना दोनों देशों के संबंधों की अहम कड़ी माना जा रहा है. अब पूरी दुनिया की नजर इस समारोह पर टिकी है, जहां कई देशों के प्रतिनिधि ईरान पहुंचकर अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम श्रद्धांजलि देंगे.
