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बाढ़ से नेपाल में गहराया ऊर्जा संकट, मदद के लिए आगे आया भारत, रोज 18 घंटे तक देगा 654 MW बिजली

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने सिर्फ घरों, सड़कों और दूसरी जरूरी सुविधाओं को ही नुकसान नहीं पहुंचाया है, बल्कि देश की बिजली व्यवस्था पर भी इसका बड़ा असर पड़ा है. कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रभावित होने के कारण नेपाल में बिजली उत्पादन कम हुआ है. ऐसे मुश्किल समय में भारत ने अपने पड़ोसी देश की मदद के लिए बिजली सप्लाई करने का फैसला किया है. भारत की ओर से नेपाल को हर दिन 18 घंटे तक बिजली उपलब्ध कराई जाएगी.

बाढ़ के बाद नेपाल को क्यों पड़ी बिजली की जरूरत?

नेपाल में बिजली उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से आता है. यानी नदियों और पानी की मदद से बिजली बनाई जाती है. हाल में आई बाढ़ के कारण कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं. इसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ा.

ऐसे में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ने की स्थिति बन गई. इसी कमी को पूरा करने और आम लोगों तक बिजली की सप्लाई बनाए रखने के लिए भारत से अतिरिक्त बिजली लेने का रास्ता चुना गया है.

दो ट्रांसमिशन लाइनों से पहुंचेगी बिजली

भारत से नेपाल तक बिजली पहुंचाने के लिए पहले से मौजूद क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके लिए दो प्रमुख लाइनों को मंजूरी दी गई है.

टनकपुर-महेंद्रनगर 132 KV सिंगल-सर्किट लाइन के जरिए नेपाल को अधिकतम 54 MW बिजली दी जा सकेगी. वहीं मुजफ्फरपुर-ढलकेबार 400 KV डबल-सर्किट लाइन से अधिकतम 600 MW बिजली भेजी जा सकती है.

दोनों को मिलाकर भारत से नेपाल को अधिकतम 654 MW तक बिजली सप्लाई करने की अनुमति दी गई है.

रोज 18 घंटे तक मिलेगी बिजली

भारत के बिजली मंत्रालय ने अतिरिक्त बिजली एक्सपोर्ट करने की मंजूरी दे दी है. यह व्यवस्था 13 सितंबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगी.

इस दौरान नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी को हर दिन 18 घंटे तक अधिकतम 654 MW बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी. हालांकि, वास्तविक सप्लाई नेपाल की जरूरत और ग्रिड की स्थिति पर निर्भर कर सकती है.

भारत-नेपाल के बीच पहले से होता है बिजली का कारोबार

भारत और नेपाल के बीच बिजली का लेन-देन पहले से होता रहा है. खास बात यह है कि यह रिश्ता सिर्फ भारत से नेपाल को बिजली देने तक सीमित नहीं है. जरूरत पड़ने पर नेपाल भारत से बिजली लेता है, जबकि हाइड्रोपावर उत्पादन ज्यादा होने पर वह भारत को बिजली बेचता भी है.

दोनों देशों ने पिछले कुछ वर्षों में क्रॉस-बॉर्डर बिजली व्यापार के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क को भी मजबूत किया है.

मुश्किल वक्त में पड़ोसी की मदद

बाढ़ के बाद नेपाल के सामने बिजली उत्पादन को सामान्य स्तर पर लाने की चुनौती है. ऐसे समय में भारत से मिलने वाली अतिरिक्त बिजली वहां घरों, अस्पतालों, कारोबार और दूसरी जरूरी सेवाओं की बिजली जरूरत पूरी करने में मदद कर सकती है.

फिलहाल यह व्यवस्था दिसंबर के आखिर तक रखने की बात है. इस दौरान नेपाल अपने प्रभावित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और बिजली नेटवर्क को सामान्य करने की दिशा में काम कर सकेगा. भारत का यह कदम दोनों पड़ोसी देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा सहयोग को भी आगे बढ़ाता है.