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नेपाल बाढ़ से कितना पीछे गया देश, अब कैसे बदलेगी नेपाल की अर्थव्यवस्था?

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

टिएनपी डेस्क(TNP DESK): नेपाल इस समय सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा से नहीं, बल्कि एक बड़े आर्थिक संकट से भी जूझ रहा है. 26 अगस्त 2026 को हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर से जुड़ी एक बड़ी घटना के बाद अचानक आई बाढ़ और मलबे के बहाव ने नेपाल के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई. सड़कें, पुल, घर, बिजली परियोजनाएं और व्यापारिक रास्ते बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. इसका सीधा असर अब देश की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है.

इस आपदा से संपत्ति, घर और बुनियादी ढांचे को करीब 387.5 अरब नेपाली रुपये यानी लगभग 2.56 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है. शुरुआती चार महीनों में ही सड़क, अस्थायी आवास, पेयजल और बिजली व्यवस्था बहाल करने के लिए करीब 52.6 मिलियन डॉलर की जरूरत बताई गई है. वहीं, व्यापक पुनर्निर्माण की लागत 4 से 5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है. यह राशि नेपाल की अर्थव्यवस्था के लगभग दसवें हिस्से के बराबर है.

सिर्फ घर नहीं, पूरी अर्थव्यवस्था को लगा झटका

बाढ़ से सबसे बड़ा नुकसान नेपाल के इंफ्रास्ट्रक्चर को हुआ है. कई सड़कें और पुल टूटने से प्रभावित इलाकों का दूसरे हिस्सों से संपर्क मुश्किल हुआ है. खास तौर पर चीन सीमा से जुड़े व्यापारिक रास्तों पर असर पड़ने से सामान की आवाजाही प्रभावित हुई है.

नेपाल जैसी अर्थव्यवस्था के लिए सड़क और व्यापारिक मार्ग बेहद महत्वपूर्ण हैं. पहाड़ी इलाकों में सड़कें बंद होने का मतलब सिर्फ यातायात रुकना नहीं है. इससे बाजारों में सामान पहुंचना मुश्किल होता है, कारोबारियों की लागत बढ़ती है और स्थानीय लोगों की आमदनी पर भी असर पड़ता है.

बाढ़ ने कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचाया है. नेपाल अपनी बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाकर आर्थिक विकास को गति देने की कोशिश कर रहा था, लेकिन इस आपदा ने इसी क्षेत्र की कमजोरी उजागर कर दी है. रिपोर्टों के अनुसार कई जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं और देश की बिजली उत्पादन क्षमता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ है.

पर्यटन और स्थानीय कारोबार पर भी असर

नेपाल की अर्थव्यवस्था में टूरिज्म की बड़ी भूमिका है. हिमालय, ट्रेकिंग, धार्मिक स्थल और एडवेंचर टूरिज्म देश के लिए विदेशी मुद्रा कमाने के महत्वपूर्ण साधन हैं. बाढ़ से सड़कें और पर्यटन से जुड़े रास्ते प्रभावित होने के कारण कई इलाकों में पर्यटकों की आवाजाही पर असर पड़ सकता है.

खेती पर असर तो महंगाई का खतरा

नेपाल की बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है. बाढ़ और मलबे से खेत, पशुधन और स्थानीय बाजार प्रभावित होने पर किसानों की आय पर दबाव बढ़ सकता है.

अगर स्थानीय स्तर पर उत्पादन कम होता है और दूसरी जगहों से सामान मंगाना पड़ता है, तो परिवहन लागत बढ़ सकती है. इसका असर खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी पड़ सकता है. यानी बाढ़ का असर सिर्फ उस इलाके तक सीमित नहीं रहेगा जहां पानी और मलबे ने तबाही मचाई है, बल्कि इसका प्रभाव बाजारों तक पहुंच सकता है.

भारत, चीन और अंतरराष्ट्रीय मदद की भूमिका

नेपाल की अर्थव्यवस्था के लिए आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है. भारत और चीन जैसे पड़ोसी देशों के साथ-साथ दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की मदद से राहत और पुनर्निर्माण का काम तेज किया जा सकता है.

नेपाल ने जलवायु परिवर्तन से जुड़े नुकसान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद और क्षतिपूर्ति की मांग भी उठाई है. उसका तर्क है कि हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के प्रति बेहद संवेदनशील है.

अब बदलनी होगी आर्थिक रणनीति

इस आपदा के बाद नेपाल के लिए सिर्फ पुराना इंफ्रास्ट्रक्चर दोबारा बनाना पर्याप्त नहीं होगा. उसे ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जो भविष्य की बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी आपदाओं का सामना कर सके.

विशेषज्ञों के मुताबिक, भविष्य के विकास में क्लाइमेट-रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा निवेश करना जरूरी होगा. सड़क और पुल बनाते समय प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को ध्यान में रखना होगा. जलविद्युत परियोजनाओं के लिए भी बेहतर आपदा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था जरूरी होगी.

इसके साथ ही नेपाल को आपदा बीमा का दायरा बढ़ाने, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और सरकारी आपदा राहत फंड को अधिक सक्षम बनाने पर ध्यान देना होगा. हालिया आपदा ने दिखा दिया है कि एक बड़ी प्राकृतिक घटना कुछ ही दिनों में वर्षों के विकास को पीछे धकेल सकती है.

क्या नेपाल फिर से पटरी पर लौट पाएगा?

नेपाल के सामने चुनौती बड़ी है, लेकिन यह संकट आर्थिक बदलाव का मौका भी बन सकता है. अगर पुनर्निर्माण सिर्फ टूटे हुए पुल और सड़कें बनाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बेहतर और सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर केंद्रित होता है, तो भविष्य में आपदाओं का आर्थिक नुकसान कम किया जा सकता है.

अभी नेपाल के लिए सबसे जरूरी है कि राहत और पुनर्निर्माण का पैसा सही जगह पहुंचे, प्रभावित लोगों को जल्दी आर्थिक सहायता मिले और व्यापारिक रास्तों को जल्द से जल्द बहाल किया जाए.

इस बाढ़ ने नेपाल को बड़ा आर्थिक झटका दिया है. करीब 2.56 अरब डॉलर का तत्काल नुकसान और 4 से 5 अरब डॉलर तक की संभावित पुनर्निर्माण लागत बताती है कि देश को सामान्य स्थिति में लौटने में लंबा वक्त लग सकता है.

लेकिन आने वाले वर्षों में नेपाल की अर्थव्यवस्था किस दिशा में जाएगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार इस आपदा से सिर्फ नुकसान की भरपाई करती है या इससे सीख लेकर एक ज्यादा मजबूत, सुरक्षित और आपदा-रोधी अर्थव्यवस्था तैयार करती है.