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भारत-कतर बैठक में ऊर्जा और व्यापार पर जोर, अमेरिका-ईरान वार्ता को नई दिशा

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपनी हालिया कतर यात्रा के दौरान वहां के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी से मुलाकात की. इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और कतर के संबंधों को और मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा की. साथ ही विदेश मंत्री ने अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई बातचीत में कतर द्वारा निभाई गई अहम भूमिका की भी सराहना की.

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई वर्षों से तनाव बना हुआ है. दोनों देशों के बीच कई बार सैन्य टकराव, सीमा पार हमले और राजनीतिक मतभेद सामने आए हैं. इन हालात के कारण बातचीत का सिलसिला भी रुक गया था. लेकिन हाल के दिनों में दोनों देशों ने एक बार फिर बातचीत शुरू करने का फैसला किया है. इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में कतर ने महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाई है.

इस साल की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे और युद्धविराम टूटने की आशंका बढ़ गई थी. ऐसे समय में कतर ने दोनों देशों के बीच लगातार संपर्क बनाए रखा. शांत और संतुलित कूटनीति के जरिए उसने दोनों पक्षों को फिर से वार्ता की मेज पर लाने में मदद की. इसके बाद बातचीत को आगे बढ़ाने का रास्ता तैयार हुआ.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कतर की इस भूमिका की काफी चर्चा हो रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि कतर ने बिना किसी बड़े राजनीतिक प्रदर्शन के लगातार संवाद बनाए रखा. इसी कारण दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करने में मदद मिली. हालांकि अंतिम दौर की बातचीत पारंपरिक तटस्थ स्थान स्विट्जरलैंड में होने की संभावना बनी, लेकिन बातचीत को दोबारा शुरू कराने में कतर का योगदान महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

जयशंकर और कतर के प्रधानमंत्री के बीच हुई बैठक में केवल क्षेत्रीय मुद्दों पर ही नहीं बल्कि भारत और कतर के द्विपक्षीय संबंधों पर भी चर्चा हुई. दोनों नेताओं ने ऊर्जा, व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर विचार साझा किए. इसके अलावा पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी बातचीत हुई.

विदेश मंत्री की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में तेजी से राजनीतिक बदलाव देखने को मिल रहे हैं. अमेरिका और ईरान के बीच नए समझौते के बाद क्षेत्र में तनाव कम करने और आपसी संवाद बढ़ाने की कोशिशें तेज हुई हैं. इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाना और लंबे समय से चले आ रहे विवादों का शांतिपूर्ण समाधान तलाशना है.

अमेरिका और ईरान के बीच अगले दौर की तकनीकी वार्ता 11 जुलाई को आयोजित हो सकती है. हालांकि बैठक किस देश में होगी, इसका अंतिम फैसला अभी नहीं लिया गया है. इस वार्ता में सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है. खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में शांति और समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के उपायों पर विचार किया जाएगा.

11 जुलाई की बैठक का उद्देश्य दो सप्ताह पहले हुए इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के तहत तय किए गए ढांचे को आगे बढ़ाना है. इस समझौते के अनुसार दोनों देशों को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े व्यापक समझौते पर सहमति बनाने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है. आने वाली वार्ता को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.