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नेपाल बाढ़ में लापता हजारों लोगों के परिवारों की मुश्किल, मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आसान प्रक्रिया की मांग

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद हजारों परिवार अब भी अपनों का इंतजार कर रहे हैं. कई परिवारों को अब अपने लापता रिश्तेदारों के जीवित मिलने की उम्मीद भी कम होती जा रही है. ऐसे परिवारों ने नेपाल सरकार से मांग की है कि आपदा में लापता लोगों को मृत घोषित करने और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए तेज और आसान कानूनी प्रक्रिया बनाई जाए.

परिवारों का कहना है कि शव नहीं मिलने के कारण वे मृत्यु प्रमाण पत्र हासिल नहीं कर पा रहे हैं. इससे सरकारी मुआवजा, बीमा क्लेम, बैंक से जुड़े काम, विरासत और संपत्ति ट्रांसफर जैसे कई जरूरी मामले अटके हुए हैं.

अधिकारियों ने लापता लोगों की संख्या 5,179 से बढ़ाकर 6,150 कर दी है. वहीं मृतकों की संख्या 1,403 तक पहुंच चुकी है. इनमें केवल 158 शवों की पहचान होने की रिपोर्ट है.

कुशा घास के पुतले बनाकर किया अंतिम संस्कार

कई परिवार लंबे इंतजार के बाद अपने लापता रिश्तेदारों के लौटने की उम्मीद खो चुके हैं. शव नहीं मिलने के कारण कुछ परिवारों ने कुशा घास से पुतले बनाकर प्रतीकात्मक रूप से अंतिम संस्कार भी किया है.

लेकिन धार्मिक रीति-रिवाज पूरे करने के बाद भी उनकी कानूनी परेशानी खत्म नहीं हुई है. मृत्यु प्रमाण पत्र के बिना वे राहत और दूसरे आर्थिक लाभ हासिल नहीं कर पा रहे हैं.

बाढ़ में लापता लोगों के रिश्तेदार अपनी परेशानी भी सामने रख रहे हैं. कई परिवारों का कहना है कि स्थानीय कार्यालय मृत्यु प्रमाण पत्र के बिना आर्थिक सहायता से जुड़े दस्तावेज आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं.

क्या कहता है नेपाल का कानून?

नेपाल के सिविल कोड की धारा 40 के तहत सामान्य तौर पर लगातार 12 साल तक लापता रहने वाले व्यक्ति को कुछ परिस्थितियों में मृत माना जा सकता है. हालांकि आपदा और दुर्घटना के मामलों के लिए कानून में अलग रास्ता भी मौजूद है.

धारा 40(4) के तहत संबंधित व्यक्ति अदालत में आवेदन देकर लापता व्यक्ति की मृत्यु की न्यायिक घोषणा की मांग कर सकता है. इसके लिए लापता होने की तारीख, स्थान, परिस्थितियां और उपलब्ध सबूत अदालत के सामने रखने होते हैं. सबूतों की जांच के बाद अदालत बिना शव मिले भी मृत्यु की न्यायिक घोषणा कर सकती है.

परिवारों की परेशानी यह है कि बाढ़ से प्रभावित हजारों लोगों को अलग-अलग अदालतों में जाकर यह प्रक्रिया पूरी करनी पड़े तो इसमें समय और पैसा दोनों लग सकते हैं. इसी वजह से वे आसान और तेज व्यवस्था की मांग कर रहे हैं.

अधिकारियों से राहत की उम्मीद

स्थानीय अधिकारियों ने भी परिवारों के सामने आ रही कानूनी परेशानी को स्वीकार किया है. प्रभावित परिवारों को मृतकों के परिजनों जैसी सुविधाएं देने के रास्तों पर चर्चा होने की बात सामने आई है. हालांकि स्थानीय कार्यालय मौजूदा कानूनी प्रक्रिया से बंधे हुए हैं.

26 अगस्त को आई थी बाढ़

26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा के पास हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटने के बाद तेज बाढ़ आई थी. पानी, बर्फ और मलबे के तेज बहाव ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई. सड़कें, पुल, बस्तियां और जलविद्युत परियोजनाएं इसकी चपेट में आईं.

अब राहत और बचाव अभियान के साथ उन हजारों परिवारों की कानूनी मुश्किल भी बड़ी चुनौती बन गई है, जिनके अपने अब तक लापता हैं.