टीएनपी डेस्क (TNP DESK): यूरोप इस समय भीषण गर्मी की मार झेल रहा है. हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि नीदरलैंड्स ने अपने इतिहास में पहली बार भीषण गर्मी को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है. बीते हफ्ते से शुरू हुए इस अलर्ट के तहत लोगों को अगले एक सप्ताह तक बेहद सतर्क रहने की सलाह दी गई है. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे जनजीवन के साथ-साथ परिवहन सेवाओं पर भी बड़ा असर पड़ने की आशंका है.
नीदरलैंड्स के राष्ट्रीय मौसम संस्थान ने देश के अधिकांश हिस्सों के लिए रेड अलर्ट जारी करते हुए लोगों से अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने और सरकार व आपातकालीन सेवाओं की सभी सलाहों का पालन करने की अपील की है. मौसम विभाग का कहना है कि अगले सात दिनों तक अत्यधिक गर्मी का असर बना रह सकता है और कई क्षेत्रों में हीट स्ट्रोक तथा डिहाइड्रेशन का खतरा काफी बढ़ जाएगा. देश के 12 प्रांतों में से आठ प्रांत रेड अलर्ट के दायरे में हैं, जबकि उत्तरी क्षेत्रों और दक्षिणी प्रांत जीलैंड में ऑरेंज अलर्ट लागू किया गया है. प्रशासन ने लोगों से पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, धूप से बचने और बुजुर्गों, बच्चों तथा बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है.
भीषण गर्मी का असर सार्वजनिक परिवहन पर भी साफ दिखाई देने लगा है. अत्यधिक तापमान को देखते हुए डच रेलवे ने कई ट्रेनों की सेवाएं सीमित कर दी हैं. वहीं, देश के बुनियादी ढांचा मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही सड़क यात्रा करें, क्योंकि तेज गर्मी के कारण सड़क और रेल दोनों के ढांचे को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है. गर्मी की यह लहर केवल नीदरलैंड्स तक सीमित नहीं है. फ्रांस और ब्रिटेन में भी तापमान ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं और जून के पुराने रिकॉर्ड टूट चुके हैं. वहीं इटली में मौसम विशेषज्ञों ने आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ने की संभावना जताई है, जहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है.
जर्मनी में भी गर्मी का असर गंभीर रूप से देखने को मिला. अत्यधिक तापमान के कारण A2 मोटरवे की सड़क कई जगहों पर फट गई और उसकी सतह मुड़ गई, जिससे यातायात प्रभावित हुआ. ऑस्ट्रिया की राष्ट्रीय रेलवे कंपनी ने भी चेतावनी दी है कि लगातार बढ़ते तापमान के कारण रेलवे ट्रैक में विकृति आ सकती है, जिससे ट्रेन संचालन प्रभावित हो सकता है. भीषण गर्मी से उत्तरी यूरोप भी अछूता नहीं है. स्वीडन में अत्यधिक तापमान के कारण रेलवे ट्रैक मुड़ गया, जिसके चलते एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई. इस घटना के बाद राजधानी स्टॉकहोम और देश के दूसरे सबसे बड़े शहर गोथेनबर्ग के बीच रेल यातायात बाधित हो गया.
जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप में लगातार बढ़ रही हीटवेव वैश्विक जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है. वैज्ञानिकों के अनुसार, यूरोप का तापमान वैश्विक औसत की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है, जिसके कारण हर साल गर्मी की तीव्रता और अवधि दोनों बढ़ती जा रही हैं. मौसम एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि अगले एक सप्ताह तक यूरोप के कई हिस्सों में भीषण गर्मी का असर बना रहेगा. ऐसे में लोगों से सावधानी बरतने, धूप में कम निकलने और स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है.