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बड़ी खबर: अमेरिका के एयर स्ट्राइक से दहला ईरान, 10 से ज्यादा शहर बने निशाना

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Senior News Publisher • TheNewsPost.in

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): मिडिल ईस्ट में हालात एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं. गुरुवार सुबह अमेरिका ने ईरान के कई शहरों और सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए. इन हमलों में केश्म, किश, काजेरून, अहवाज, अबादान, शादेगान, अरवंदकेनार, बुशेहर, जाम और खोरमोज समेत 10 से ज्यादा शहरों को निशाना बनाया गया. हमलों के बाद कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल है और सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं.

अमेरिका ने क्या कहा

अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने बताया कि इस अभियान का मकसद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की सैन्य क्षमता को कमजोर करना था. अमेरिका के अनुसार, हमलों में कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों, तटीय निगरानी केंद्रों, रक्षा प्रतिष्ठानों और समुद्री सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई क्षेत्र में अमेरिकी हितों और सैनिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर की गई.

ट्रम्प का सख्त संदेश

हवाई हमलों से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला करने की कोशिश की गई थी. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिकी ठिकानों पर हमला होगा तो उसका जवाब भी पूरी ताकत से दिया जाएगा. ट्रम्प ने कहा कि "उन्होंने हमला करने की कोशिश की. अब जवाब देने की हमारी बारी है."

पिछले 24 घंटे में तेजी से बदले हालात

मिडिल ईस्ट में बीते 24 घंटे के दौरान कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने पूरे क्षेत्र का तनाव और बढ़ा दिया.

सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कहा कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो अमेरिका ईरान के खिलाफ और भी बड़ा सैन्य अभियान चला सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में बातचीत और समझौते की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.

इसी दौरान अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स (PMF) के ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए. PMF के अनुसार, इस कार्रवाई में कम से कम 20 लड़ाकों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं.

उधर मिस्र के दमियत्ता बंदरगाह पर खड़े एक अमेरिकी गैस स्टोरेज टैंकर को ड्रोन से निशाना बनाया गया. हमले के बाद जहाज में आग लग गई, लेकिन राहत टीमों ने समय रहते आग पर काबू पा लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया.

तेल की कीमतों पर भी पड़ा असर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिखाई देने लगा है. ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि अगर सैन्य तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार भी जा सकती है. इसका असर दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है.

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान का दावा

ईरानी नौसेना ने दावा किया है कि होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्र पर उसका पूरा नियंत्रण है. ईरान का कहना है कि उसकी अनुमति के बिना इस रास्ते से कोई भी जहाज नहीं गुजर सकेगा. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की सप्लाई होती है. ऐसे में इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और बढ़ा दी है.

पूरी दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट पर

अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ता टकराव अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है. इसका असर वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी साफ दिखाई देने लगा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. फिलहाल सभी देशों की नजर मिडिल ईस्ट के बदलते घटनाक्रम पर टिकी हुई है.