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सीजफायर के 8 घंटे बाद फिर बरसे बम, इजराइल-हिजबुल्लाह जंग फिर भड़की

Saumya Shukla
Senior News Publisher • TheNewsPost.in
सीजफायर के 8 घंटे बाद फिर बरसे बम, इजराइल-हिजबुल्लाह जंग फिर भड़की

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): मिडिल ईस्ट में हालात एक बार फिर मुश्किल हो गए हैं. इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच शुक्रवार को युद्ध रोकने को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन यह शांति ज्यादा देर टिक नहीं सकी. सीजफायर की घोषणा के करीब 8 घंटे बाद ही इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में कई जगहों पर हवाई हमले कर दिए.

इजराइली सेना ने ड्रोन और तोपों की मदद से नबातियेह क्षेत्र को निशाना बनाया. इन हमलों में कम से कम 16 लोगों की जान चली गई. वहीं लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि दक्षिणी लेबनान और बेका घाटी में शुक्रवार रात से शुरू हुए हमलों में कुल 47 लोगों की मौत हुई है, जबकि 97 लोग घायल हुए हैं. मार्च की शुरुआत से अब तक इस संघर्ष में मरने वालों की संख्या लगभग 4 हजार के करीब पहुंच गई है.

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि देश अपनी सुरक्षा को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि गाजा और लेबनान में सैन्य अभियान तब तक जारी रहेंगे, जब तक इजराइल को अपने सुरक्षा लक्ष्य पूरे होते नहीं दिखते.

उधर अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते के बाद आगे की बातचीत को लेकर भी हलचल तेज है. दोनों देशों के बीच शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में पहली औपचारिक बैठक थी, लेकिन इसे फिलहाल टाल दिया गया है. लेबनान में जारी इजराइली कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों के बीच कुछ मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ आगे की बातचीत की तैयारी के लिए स्विट्जरलैंड रवाना हो चुके हैं.

इस बीच होर्मुज स्ट्रेट में भी गतिविधियां बढ़ी हैं. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की खबरों के बाद समुद्री व्यापार में तेजी देखी गई है. हाल के दिनों में बड़ी संख्या में कारोबारी जहाज इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरे हैं. इसके बावजूद सैकड़ों जहाज और हजारों नाविक अब भी खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं और स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी इस पूरे मामले पर कई बड़े बयान दिए हैं. उन्होंने दावा किया कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की रणनीति सफल रही है और ईरान अब पहले जैसी स्थिति में नहीं है. ट्रम्प ने अपने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले प्रशासन ईरान को लेकर कमजोर रुख अपनाते रहे, जबकि उनकी सरकार ने सख्त कदम उठाए.