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इंडोनेशिया में ज्वालामुखी का तांडव! 50 हजार फीट ऊपर तक पहुंची राख, भारत की उड़ानों पर भी पड़ा असर

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

टिएनपी डेस्क (TNP DESK): इंडोनेशिया के अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी रविवार तड़के अचानक फट गया. विस्फोट इतना तेज था कि ज्वालामुखी से निकली राख का गुबार आसमान में करीब 50 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया. राख फैलने के कारण हवाई यातायात पर बड़ा असर पड़ा है. राजधानी जकार्ता सहित आसपास के कई इलाकों में इसका प्रभाव देखा गया. सुरक्षा को देखते हुए सोएकार्नो-हट्टा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ानों का संचालन कुछ समय के लिए रोक दिया गया. इसका असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ा और भारत से जुड़ी कई उड़ानों के रद या प्रभावित होने की स्थिति बनी. यात्रियों को अपनी उड़ान की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही एयरपोर्ट जाने की सलाह दी गई.

सुबह 3:53 बजे फटा ज्वालामुखी

जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच सुंडा स्ट्रेट में स्थित अनाक क्राकाटोआ में शनिवार से ही हलचल के संकेत मिलने लगे थे. रविवार सुबह करीब 3:53 बजे ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ. यह विस्फोट करीब 30 सेकंड तक चला. विस्फोट के बाद बड़ी मात्रा में राख और धुआं आसमान में फैल गया. राहत की बात यह है कि फिलहाल इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. खतरे को देखते हुए स्थानीय लोगों और पर्यटकों को ज्वालामुखी के सक्रिय क्रेटर से कम से कम तीन किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी दी गई है.

चार घंटे तक उड़ानों का संचालन रोका

ज्वालामुखी विस्फोट का सबसे ज्यादा असर हवाई सेवाओं पर पड़ा. एयरपोर्ट प्रशासन की ओर से जारी ट्रैवल एडवाइजरी के अनुसार, सोएकार्नो-हट्टा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रविवार सुबह 5:30 बजे से 9:30 बजे तक उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया. सोएकार्नो-हट्टा देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में शामिल है. उड़ानें रद होने और उनके समय में बदलाव के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा. कई यात्रियों ने अपनी टिकट का रिफंड मांगा, जबकि कुछ यात्रियों ने चेक-इन के बाद अपना सामान वापस लिया.

भारत से जुड़ी उड़ानों पर भी असर

जकार्ता से भारत के लिए भी हवाई सेवाएं संचालित होती हैं. ज्वालामुखी की राख के कारण जकार्ता एयरपोर्ट पर परिचालन प्रभावित होने का असर भारत से जुड़ी कई उड़ानों पर भी पड़ा. कुछ उड़ानों को रद या उनके समय में बदलाव करना पड़ा. इससे भारत और इंडोनेशिया के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा. यात्रियों को एयरलाइंस की ओर से जारी ताजा जानकारी पर नजर रखने और एयरपोर्ट पहुंचने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जांचने की सलाह दी गई.

जकार्ता समेत कई इलाकों की ओर फैली राख

इंडोनेशिया की ज्वालामुखी विज्ञान एजेंसी और ऑस्ट्रेलिया के डार्विन ज्वालामुखी राख सलाहकार केंद्र ने सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए राख के दो बड़े गुबारों की पहचान की. इनमें से एक राख का बादल करीब 20 हजार फीट की ऊंचाई पर उत्तर-पूर्व दिशा की ओर बढ़ता देखा गया. इसके कारण जकार्ता, बैंटेन, पश्चिमी जावा और आसपास के समुद्री इलाकों पर असर पड़ा. ज्वालामुखी की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है. अधिकारियों ने लोगों से प्रतिबंधित क्षेत्र में नहीं जाने और प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने को कहा है.