टीएनपी डेस्क (TNP DESK): दुनिया के हर देश में सरकार चलाने का तरीका एक जैसा नहीं होता. कहीं राष्ट्रपति देश के साथ सरकार की भी कमान संभालते हैं, तो कहीं प्रधानमंत्री सरकार चलाते हैं और राष्ट्रपति की भूमिका संवैधानिक होती है. भारत में राष्ट्रपति देश के संवैधानिक प्रमुख हैं और प्रधानमंत्री सरकार के मुखिया. अमेरिका में राष्ट्रपति ही राष्ट्राध्यक्ष और सरकार के मुखिया दोनों हैं. ब्रिटेन में राजा राष्ट्राध्यक्ष हैं, जबकि प्रधानमंत्री सरकार चलाते हैं. फ्रांस में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां हैं. आखिर इन देशों में ऐसी अलग-अलग व्यवस्था क्यों है. इसका जवाब उनके इतिहास, संविधान और राजनीतिक व्यवस्था में छिपा है.
राष्ट्राध्यक्ष और सरकार के मुखिया में क्या फर्क है?
सबसे पहले इन दोनों पदों को समझना जरूरी है. राष्ट्राध्यक्ष किसी देश का सर्वोच्च संवैधानिक या औपचारिक प्रतिनिधि होता है. वह देश का प्रतिनिधित्व करता है और कई महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारियां निभाता है.
वहीं सरकार का मुखिया वह व्यक्ति होता है जो रोजमर्रा की सरकार चलाता है. वह मंत्रियों के साथ मिलकर नीतियां बनाता है, प्रशासन की निगरानी करता है और देश की राजनीतिक दिशा तय करता है.
कुछ देशों में दोनों जिम्मेदारियां एक ही व्यक्ति के पास होती हैं. अमेरिका इसका उदाहरण है. वहीं भारत, ब्रिटेन और जापान जैसे देशों में राष्ट्राध्यक्ष और सरकार के मुखिया अलग-अलग होते हैं.
भारत में प्रधानमंत्री सरकार के मुखिया क्यों?
भारत ने आजादी के बाद संसदीय लोकतंत्र को अपनाया. भारतीय संविधान में राष्ट्रपति को देश का संवैधानिक प्रमुख बनाया गया, जबकि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद को सरकार चलाने की जिम्मेदारी दी गई.
लोकसभा चुनाव में जिस पार्टी या गठबंधन को बहुमत मिलता है, उसके नेता को राष्ट्रपति प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं. प्रधानमंत्री अपने मंत्रियों के साथ मिलकर सरकार चलाते हैं.
राष्ट्रपति संसद का सत्र बुलाने, विधेयकों को मंजूरी देने और प्रधानमंत्री की नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक काम करते हैं. लेकिन सरकार की रोजमर्रा की नीतियां और प्रशासनिक फैसले प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह के आधार पर चलते हैं.
इसलिए भारत में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों महत्वपूर्ण हैं, लेकिन दोनों की जिम्मेदारियां अलग हैं.
अमेरिका में राष्ट्रपति ही सरकार क्यों चलाते हैं?
अमेरिका ने संसदीय व्यवस्था के बजाय राष्ट्रपति शासन प्रणाली अपनाई. वहां राष्ट्रपति ही देश के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार के मुखिया दोनों होते हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव एक अलग चुनावी प्रक्रिया के जरिए होता है. राष्ट्रपति कार्यपालिका का नेतृत्व करते हैं और सरकार के प्रमुख फैसलों में उनकी बड़ी भूमिका होती है.
अमेरिका में प्रधानमंत्री का पद नहीं है. राष्ट्रपति अपने प्रशासन के लिए विभिन्न विभागों के प्रमुखों की नियुक्ति करते हैं.
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि राष्ट्रपति के पास असीमित शक्ति होती है. अमेरिकी व्यवस्था में संसद और न्यायपालिका राष्ट्रपति की शक्तियों पर नियंत्रण रखते हैं. इसे सत्ता के विभाजन की व्यवस्था कहा जाता है.
ब्रिटेन में राजा और प्रधानमंत्री दोनों क्यों?
ब्रिटेन की राजनीतिक व्यवस्था का इतिहास काफी पुराना है. वहां आज भी राजशाही मौजूद है, लेकिन राजा के पास सरकार चलाने की वास्तविक राजनीतिक शक्ति नहीं है.
वर्तमान में किंग चार्ल्स तृतीय ब्रिटेन के राष्ट्राध्यक्ष हैं. वहीं प्रधानमंत्री सरकार के मुखिया हैं.
संसद के निचले सदन में जिस राजनीतिक दल को बहुमत मिलता है, उसके नेता को प्रधानमंत्री बनाया जाता है. प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल के साथ सरकार चलाते हैं.
राजा की भूमिका मुख्य रूप से संवैधानिक और औपचारिक है. वह कई संवैधानिक प्रक्रियाओं का हिस्सा होते हैं, लेकिन सरकार की नीतियां प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल तय करते हैं.
फ्रांस में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों क्यों?
फ्रांस की व्यवस्था थोड़ी अलग है. वहां राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों के पास महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होती हैं. इस तरह की व्यवस्था को अर्ध-राष्ट्रपति प्रणाली कहा जाता है.
फ्रांस के राष्ट्रपति का चुनाव जनता करती है. राष्ट्रपति के पास रक्षा, विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मामलों में महत्वपूर्ण अधिकार होते हैं.
वहीं प्रधानमंत्री सरकार के रोजमर्रा के प्रशासन को संभालते हैं. प्रधानमंत्री को संसद में राजनीतिक समर्थन की जरूरत होती है.
अगर राष्ट्रपति और संसद में बहुमत रखने वाली राजनीतिक ताकत अलग-अलग हो, तो प्रधानमंत्री की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो सकती है. इसलिए फ्रांस में सत्ता का संतुलन राजनीतिक परिस्थितियों के साथ बदल सकता है.
अलग-अलग देशों ने अलग व्यवस्था क्यों चुनी?
इसका सबसे बड़ा कारण इतिहास है. हर देश का राजनीतिक सफर अलग रहा है.
ब्रिटेन और जापान जैसे देशों में राजशाही की पुरानी परंपरा रही. लोकतांत्रिक व्यवस्था विकसित होने के बाद भी राजा या सम्राट के पद को पूरी तरह खत्म नहीं किया गया. उनकी भूमिका को संवैधानिक और औपचारिक बनाया गया.
अमेरिका का इतिहास अलग रहा. वहां स्वतंत्रता के बाद एक ऐसी व्यवस्था बनाई गई जिसमें राष्ट्रपति के नेतृत्व में मजबूत कार्यपालिका हो, लेकिन उसकी शक्तियों पर संसद और न्यायपालिका का नियंत्रण भी रहे.
भारत ने ब्रिटिश संसदीय प्रणाली से प्रभावित होकर ऐसी व्यवस्था अपनाई जिसमें सरकार संसद के प्रति जवाबदेह रहती है. देश के संविधान निर्माताओं ने भारत की विविधता और लोकतांत्रिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस मॉडल को चुना.
राष्ट्रपति प्रणाली में क्या होता है?
राष्ट्रपति प्रणाली में राष्ट्रपति कार्यपालिका का प्रमुख होता है. अमेरिका इसका प्रमुख उदाहरण है.
राष्ट्रपति का चुनाव संसदीय बहुमत से अलग प्रक्रिया के जरिए होता है. इसलिए सरकार बनाने के लिए राष्ट्रपति को संसद में उसी तरह बहुमत हासिल करना जरूरी नहीं होता जैसा संसदीय व्यवस्था में प्रधानमंत्री को होता है.
लेकिन राष्ट्रपति को भी संविधान के दायरे में रहकर काम करना पड़ता है. संसद कानून बनाती है और न्यायपालिका संविधान की व्याख्या करती है.
इस तरह राष्ट्रपति प्रणाली में भी सत्ता एक ही व्यक्ति के हाथ में पूरी तरह नहीं होती.
आखिर दुनिया में एक ही व्यवस्था क्यों नहीं है?
दुनिया के सभी देशों का इतिहास, समाज, राजनीतिक संघर्ष और शासन का अनुभव अलग रहा है. इसलिए सभी देशों ने अपने लिए एक जैसा शासन मॉडल नहीं चुना.
कहीं राष्ट्रपति प्रणाली है, कहीं संसदीय व्यवस्था है और कहीं दोनों का मिश्रण है. कुछ देशों मंअ आज भी राजशाही है, लेकिन वहां राजा या सम्राट की भूमिका केवल संवैधानिक और प्रतीकात्मक है.
इन सभी व्यवस्थाओं का उद्देश्य एक ही है. देश में सरकार चलाना, सत्ता पर नियंत्रण रखना और जनता के प्रति जवाबदेही तय करना.
यानी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का अंतर सिर्फ दो अलग पदों का अंतर नहीं है. यह पूरे शासन तंत्र को समझने की कुंजी है. इससे पता चलता है कि किसी देश में सरकार कैसे बनती है, फैसले कौन लेता है, सत्ता पर नियंत्रण कौन रखता है और आखिर जनता के सामने जवाबदेह कौन होता है.