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कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाओं पर महिला आयोग चिंतित, यौन उत्पीड़न कानून लागू करने का दिया राज्यों को निर्देश  

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 12:51:38 PM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): देश भर में लगातार महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न के मामले सामने आते रहते हैं. महिलाओं को लगातार उत्पीड़न का शिकार होना पड़ रहा है. सबसे ज्यादा महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न के मामले ऑफिस, कोचिंग आदि केंद्रों से आ रहे हैं. इसे लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग ने कोचिंग केंद्रों और शैक्षणिक संस्थानों में यौन उत्पीड़न की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की है और कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 और उसके तहत स्थापित दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू करने को कहा है.

2022 में महिलाओं के खिलाफ अपराध की 31,000 शिकायतें

हाल के वर्षों में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न दुनिया भर में महिलाओं को प्रभावित करने वाले सबसे अधिक दबाव वाले मुद्दों में से एक बनता जा रहा है. एनसीडब्ल्यू को 2022 में महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों की लगभग 31,000 शिकायतें मिलीं, जो 2014 के बाद सबसे अधिक हैं. करीब 54.5 फीसदी शिकायतें उत्तर प्रदेश से मिलीं. दिल्ली में 3,004 शिकायतें दर्ज की गईं. इसके बाद महाराष्ट्र (1,381), बिहार (1,368) और हरियाणा (1,362) का नंबर आता है. इसमें घरेलू हिंसा, विवाहित महिलाओं का उत्पीड़न या दहेज उत्पीड़न, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, बलात्कार और बलात्कार का प्रयास, साइबर अपराध आदि अपराध शामिल थे.  

यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013 क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने विशाखा और अन्य बनाम राजस्थान राज्य 1997 मामले में एक ऐतिहासिक फैसले में 'विशाखा दिशानिर्देश' दिया था. इन दिशानिर्देशों ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 ("यौन उत्पीड़न अधिनियम") का आधार बनाया.

यह अधिनियम कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को परिभाषित करता है और शिकायतों के निवारण के लिए एक तंत्र बनाता है. इसके तहत प्रत्येक नियोक्ता को 10 या अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक कार्यालय या शाखा में एक आंतरिक शिकायत समिति का गठन करना आवश्यक है. शिकायत समितियों के पास सबूत जमा करने के लिए सिविल कोर्ट की शक्तियां हैं. शिकायतकर्ता द्वारा अनुरोध किए जाने पर शिकायत समितियों को जांच शुरू करने से पहले समाधान प्रदान करना आवश्यक है.

इस अधिनियम के तहत सजा का प्रावधान

यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013 के तहत नियोक्ताओं के लिए दंड निर्धारित किए गए हैं. अधिनियम के प्रावधानों का पालन न करने पर जुर्माने के साथ दंडनीय होगा. बार-बार नियम का उल्लंघन करने पर ज्यादा जुर्माना लग सकता है और कारोबार चलाने के लिए लाइसेंस या पंजीकरण रद्द किया जा सकता है.

इस अधिनियम के तहत प्रशासन की भी जिम्मेदारी तय की गई है. इस अधिनियम के तहत राज्य सरकार हर जिले में जिला अधिकारी को अधिसूचित करेगी, जो एक स्थानीय शिकायत समिति (एलसीसी) का गठन करेगा ताकि असंगठित क्षेत्र या छोटे प्रतिष्ठानों में महिलाओं को यौन उत्पीड़न से मुक्त वातावरण में काम करने में सक्षम बनाया जा सके.

राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन  

बता दें कि राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 के तहत NCW को जनवरी 1992 में एक वैधानिक निकाय के रूप में स्थापित किया गया था. प्रथम आयोग का गठन 31 जनवरी 1992 को जयंती पटनायक की अध्यक्षता में किया गया था. आयोग में एक अध्यक्ष, एक सदस्य सचिव और पांच अन्य सदस्य होते हैं. राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्यक्ष को केंद्र सरकार द्वारा नामित किया जाता है.

इस आयोग का मिशन महिलाओं को उपयुक्त नीति निर्माण, विधायी उपायों आदि के माध्यम से उनके उचित अधिकारों और अधिकारों को हासिल करके जीवन के सभी क्षेत्रों में समानता और समान भागीदारी प्राप्त करने में सक्षम बनाने की दिशा में प्रयास करना है.

आयोग का मुख्य कार्य

राष्ट्रीय महिला आयोग के मुख्य कार्य महिलाओं के लिए संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों की समीक्षा करना, उपचारात्मक विधायी उपायों की सिफारिश करना, शिकायतों के निवारण को सुगम बनाना, महिलाओं को प्रभावित करने वाले सभी नीतिगत मामलों पर सरकार को सलाह देना है. महिला आयोग ने अब तक बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त की हैं और तुरंत इंसाफ दिलाने के लिए कई मामलों में स्वत: कार्रवाई की है. इसने बाल विवाह, प्रायोजित कानूनी जागरूकता कार्यक्रमों, पारिवारिक महिला लोक अदालतों के मुद्दे को उठाया और कई कानूनों की समीक्षा की. इनमें दहेज निषेध अधिनियम, 1961, गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994, भारतीय दंड संहिता 1860 शामिल हैं.

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