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भाजपा का दामन छोड़ RJD में क्यों अवसर तलाश रहें नीतीश कुमार, समझिये पूरा मामला

BY -
Samir Hussain
Samir Hussain
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 17, 2026, 4:48:49 PM

टीएनपी डेस्क( TNP DESK): बिहार में पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक हलचल तेज थी. कयास लगाई जा रही थी नीतीश कुमार भाजपा का दामन छोड़ सकते हैं. अब इस बात की पुष्टि भी हो चुकी है. नीतीश कुमार ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. इस्तीफे से पहले ही जदयू ने अपने विधायकों के साथ मीटिंग की. मीटिंग के दौरान अपने विधायकों से नीतीश कुमार ने कहा कि भाजपा हमारी पार्टी को तोड़ना चाहती थी. मुझे अपमानित करने का प्रयास करती रही. इसलिए हमने भाजपा से अलग होने का फैसला लिया है. राज्य में अब नीतीश, आरजेडी और कांग्रेस मिलकर सरकार बना सकती है. समझिये आखिर नीतीश को एनडीए के साथ गठबंधन क्यों तोड़ना पड़ा.

जदयू का सीट कम फिर भी CM  नीतीश

दरअसल, 2020 विधानसभा चुनाव के दौरान ही नीतीश कुमार ने ऐलान कर दिया था कि ये उनका आखिरी चुनाव है और अगले विधानसभा में वो चुनाव नहीं लड़ेंगे. 2020 विधानसभा चुनाव में जदयू को महज 45 सीट ही मिले थे जबकि भाजपा को 77 सीटों पर जीत हासिल हुई थी और राज्य की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी. इसके बावजूद भी भाजपा ने निर्णय लिया कि एनडीए की सरकार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही होंगे. साल 2025 विधानसभा में चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान और मुख्यमंत्री नहीं बनने की बात उन्होंने पहले ही कह दी थी. ऐसे में माना यह जा रहा था कि भाजपा उन्हें राष्ट्रपति या उप-राष्ट्रपति का टिकट देगी लेकिन वैसा हुआ नहीं. इसके अलावा केंद्र में जदयू कोटे से आरसीपी सिंह एक ही मंत्री था.

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नीतीश मॉडल की जगह गुजरात मॉडल

आरसीपी सिंह भी धीरे-धीरे भाजपा के करीबी होने लगे थे. वो अपने संबोधन में हर बार नीतीश मॉडल की जगह गुजरात मॉडल की बात करते दिखाई देते थे. जिसके बाद से नीतीश आरसीपी से खफा थे और इसका नतीजा भी देखने को मिला. जदयू ने आरसीपी को राज्यसभा का टिकट नहीं दिया. जिसके बाद अंतत: उन्हें केंद्रीय मंत्री पद छोड़ना पड़ा. हालांकि आरसीपी सिंह ने एक हफ्ते पहले ही जदयू से इस्तीफा दे दिया है. नीतीश कुमार को कई बार बतौर प्रधानमंत्री उम्मीदवार भी देखा जाता रहा है. ऐसे में अगर नीतीश भाजपा के साथ रहते तो उनका यह सपना भी पूरा नहीं हो पाता. हालांकि भाजपा का दामन छोड़ने के बाद भी नीतीश के लिए यह सपना ही रहेगा या सारी विपक्षी दल मिलकर नीतीश के सपनों को 2024 लोकसभा चुनाव में साकार करेंगे ये देखने वाली बात होगी. क्योंकि नीतीश कब किसके साथ होंगे ये किसी को नहीं पता चलता है.

 

  

      

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