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कोल इंडिया पर क्यों बढ़ने लगा निजीकरण का खतरा, जानिए कैपटिव कमर्शियल ब्लॉक ने कैसे बढ़ा दी चुनौती!

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: April 6, 2026, 12:30:53 PM

धनबाद (DHANBAD): देश ही नहीं, दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है. निजीकरण का भी खतरा मंडराने लगा है. एक तो कोयला उत्पादन-बेचने का प्रेशर है, ऊपर से प्राइवेट प्लेयर्स लगातार कोयले के उत्पादन में अपना पांव पसार रहे हैं. कैपटिव कमर्शियल ब्लॉकों ने कोल इंडिया के साथ-साथ सहायक कंपनियों के समक्ष जबरदस्त चुनौती पेश किए है. आंकड़े के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक कैपटिव कमर्शियल कोल्  ब्लॉकों ने 210.46 मिलियन टन कोयले  का उत्पादन किया है.  

कोल इंडिया की अधिकतर कंपनियां अपने उत्पादन लक्ष्य के पीछे

यह आंकड़ा पिछले  वित्तीय वर्ष से 10.22% अधिक है. दूसरी ओर कोल इंडिया की अधिकतर कंपनियां अपने उत्पादन लक्ष्य के पीछे हैं. प्राइवेट प्लेयर्स केवल  उत्पादन ही नहीं बढ़ा हैं, बल्कि डिस्पैच में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है. जानकारी के अनुसार डिस्पैच में 7.35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. मतलब कहा जा सकता है कि कोल इंडिया में कमर्शियल कोल् माइनिंग की धमक बढ़ रही है और इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है. वैसे, कोल इंडिया के लिए पिछला वित्तीय वर्ष अच्छा नहीं रहा. सूत्रों के अनुसार कोल इंडिया की अधिकांश सहायक कंपनियों के विनिवेश की मंजूरी मिल चुकी है. विनिवेश की तरफ कंपनी आगे बढ़ रही है. 

लगातार आउटसोर्स के बाद भी विनिवेश  की ओर जा रही
 
कोल इंडिया लगातार आउटसोर्स के बाद भी विनिवेश  की ओर जा रही है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या कोल इंडिया निजीकरण की ओर बढ़ रही है? दरअसल, मजदूर संगठन भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं है. पूरी तरह से संशय की स्थिति है. जिस हिसाब से प्राइवेट प्लेयर्स बढ़ रहे हैं, सब काम आउटसोर्स के हवाले हो रहे हैं, कमर्शियल कोल् माइनिंग की धमक मजबूत हो रही है, यह कोल इंडिया के निजीकरण की ओर इशारा तो नहीं है? अगर ऐसा हुआ तो कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण का उद्देश्य धूल-धुसरित हो जाएगा और फिर से कोयला उद्योग पर पहले की तरह प्राइवेट लोगों का कब्जा हो जाएगा. 

रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो

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