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भाजपा और जदयू में क्यों बढ़ गई दूरी, क्या नीतीश छोड़ेंगे बीजेपी का साथ? जानिए पूरा विश्लेषण

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 17, 2026, 4:38:25 PM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): बिहार में एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. ऐसा लग रहा है मानो कुछ उठापटक होने वाली है. खैर जो भी हो, अभी तो राज्य में बयानों का दौर चल रहा है. इन बयानों को सुन और समझ कर तो ऐसा ही लगता है कि बिहार की राजनीति में अभी कुछ ठीक नहीं चल रहा है. चलिए पहले जानते हैं कि मामला क्या है और हम किन बयानों की बात कर रहे हैं.

मामला जदयू और बीजेपी के बीच खटपट की है. काफी लंबे समय से दोनों पार्टियां बिहार में सरकार चला रही है. मगर, इस दौरान दोनों के बीच वाद-विवाद भी देखे गए हैं. मगर, चीजें पहले उतनी बिगड़ी हुई नहीं लग रही थी, जैसा कि अब लग रही हैं.

आरसीपी सिंह ने इस्तीफा देते हुए नीतीश पर बोला हमला  

अब सवाल है कि अभी क्या हो गया? तो आपको बता दें कि बिहार में फिर सियासी तापमान तब गर्म हुआ जब पूर्व केन्द्रीय मंत्री और जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. और तो और उन्होंने ये बयान दिया कि जदयू डूबता हुआ जहाज है, लोग जल्दी से इसे उतर जाएँ नहीं तो वे भी डूब जाएंगे. इसके साथ ही उन्होंने नीतीश कुमार पर भी टिप्पणी कर दी. कभी नीतीश कुमार के खासम खास रहे आरसीपी सिंह ने ये कह दिया कि सात जन्म में भी नीतीश कुमार देश के प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे.

ललन सिंह ने किया आरसीपी सिंह का पलटवार

फिर क्या था, मामले ने तूल पकड़ लिया. आरसीपी सिंह को जवाब देने खुद जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह सामने आ गए. उन्होंने आरसीपी सिंह के साथ इशारों ही इशारों में बीजेपी पर भी तंज कसा और कहा कि बिहार में दूसरे चिराग मॉडल की तैयारी थी, जिसे हमने समय रहते रोक लिया. आरसीपी सिंह का तन कहीं और था और मन कहीं और. 

चिराग ने बताया क्या है चिराग मॉडल?

अब राजनीति कैसे करवट लेती है वो समझिय, ललन सिंह ने तो निशाना आरसीपी सिंह और बीजेपी पर मारा था, लेकिन उन्होंने उदाहरण चिराग मॉडल का दे दिया. इससे चिराग पासवान थोड़े खफा दिखे. उन्होंने कहा कि राज्य में चिराग का सिर्फ एक मॉडल है बिहार फर्स्ट-बिहारी फर्स्ट. इससे नीतीश कुमार को एतराज है. इसके साथ ही उन्होंने नीतीश कुमार पर भी जमकर हमला बोला है.

इन बयानों के क्या है मायने

ये तो थी बयानों की बात. अब समझते हैं कि इन बयानों के क्या मायने हैं. जदयू अध्यक्ष ललन सिंह ने अपने बयान में चिराग मॉडल की बात की थी. चिराग भले ही कुछ कह ले. मगर, सभी जानते हैं कि ललन सिंह का इशारा किस चिराग मॉडल की ओर था. ललन सिंह का इशारा था कि जिस तरह लोजपा पार्टी का विभाजन हुआ, जो कि चिराग और उनके चाचा के बीच काफी विवादित मामला भी रहा. ठीक उसी तरह जदयू के साथ करने की साजिश रची जा रही थी. जिसे जदयू ने समय रहते रोक लिया. अब ललन सिंह का इशारा साफ-साफ समझा जा सकता है कि वो किस ओर इशारा कर रहे हैं. एक ओर आरसीपी सिंह पर इशारा था और दूसरा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका इशारा भाजपा पर था.

क्या है अब राजनीतिक संभावना

ऐसे में भाजपा और जदयू के बीच ब्रेकअप होने की संभावना बन रही है. बस, संभावना बन रही है, क्योंकि इस पर भाजपा या जदयू के नेताओं की ओर से कोई बयान सामने नहीं आए हैं. इस संभावना के पीछे भी एक कारण है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नीतीश कुमार और सोनिया गांधी के बीच फोन पर बात हुई है. अगर, सच में ये बात हुई है तो राज्य में नए राजनीतिक समीकरण बनने की भी संभावना बन सकती है. अगर, राज्य की रजनीतिक समीकरण बदलती है तो ये देखने वाली बात होगी कि जदयू किसके साथ जाती है. मौजूदा समय में बिहार की राजनीतिक संख्या बल की बात करें तो बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं. इनमें एक सीट खाली है. किसी भी सरकार को चलाने के लिए 122 विधायकों का समर्थन जरूरी है. अभी आरजेडी के पास सबसे ज्यादा 79 विधायक हैं. वहीं, बीजेपी के पास 77, जदयू के पास 45, कांग्रेस के पास 19, वहीं लेफ्ट के पास 16 विधायक हैं. अगर नीतीश भाजपा का साथ छोडते है तो उनके पास यूपीए ही एकमात्र विकल्प है. बिहार में अभी राजद, कांग्रेस और लेफ्ट यूपीए गठबंधन का हिस्सा है. ऐसे में राज्य में आरजेडी और जडयू मिलकर भी सरकार बना सकती है. मगर चर्चाएं हैं कि राज्य में JDU, RJD और कांग्रेस मिलकर सरकार बना सकती है.

केंद्र में मंत्री पद बनी बीजेपी-जदयू में खटपट की वजह

अब समझिए आखिर नीतीश का भाजपा से सियासी ब्रैकअप की बातें क्यों चल रही हैं.. कहा ये जा रहा है कि जदयू मोदी कैबिनेट में कम से कम 2 मंत्री पद चाहती थी. एक केंद्रीय मंत्री और दूसरा केंद्रीय राज्य मंत्री लेकिन भाजपा ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. इतना ही नहीं भाजपा ने एक हफ्ते पहले पटना में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की, इसमें जदयू को नहीं बुलाया गया. जेपी नड्डा और अमित शाह ने रोड़ शो किया. इसमें भी जदयू को दरकिनार किया गया. जिसके बाद से ही बिहार का सियासी तापमान गर्म हो गया और देखते देखते मामला सियासी ब्रैकअप तक जा पहुंचा है.

नीतीश कुमार पहले भी बीजेपी से गठबंधन तोड़ राजद के साथ गठबंधन कर चुके हैं. मगर, जिस तरह से पिछली बार उन्होंने राजद से बीच सरकार में गठबंधन तोड़ बीजेपी के साथ गठबंधन किया था, उससे राजद तो जदयू के साथ गठबंधन करने से पहले अपने कदम जरूर फूँक-फूँक कर रखेगी. हालाँकि, राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है. अब देखना होगा कि बिहार की राजनीति किस ओर करवट लेती है.    

Tags:News

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