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बुखार आने पर डॉक्टर डोलो-650 ही क्यों देते हैं, जानिए पूरा मामला

बुखार आने पर डॉक्टर डोलो-650 ही क्यों देते हैं, जानिए पूरा मामला

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): आपको या आपके आस-पास के लोगों को जब भी बुखार लगती है, तो आमतौर पर डॉक्टर पैरासिटामोल दवा खाने की सलाह देते हैं. मगर, अलग-अलग दवा कंपनी पैरासिटामोल को अपने-अपने नाम से बेचती हैं. मगर, हाल के दिनों में खासकर कोरोना महामारी के दौरान पैरासिटामोल दवा 'डोलो'  खूब चर्चा में रही. इस दौरान डॉक्टरों ने मरीजों को बुखार के लिए सिर्फ डोलो-650 ही दिया. ऐसा क्यों हुआ? इसके पीछे क्या खेल था? इससे जुड़ा एक मामला सामने आया है.

 केंद्र सरकार से 7 दिन में जवाब

दरअसल, डोलो कंपनी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. इस याचिका में बताया गया कि फार्मा कंपनी ने बुखार की दवा डोलो-650 मरीजों को देने के लिए देशभर में डॉक्टरों को 1 हजार करोड़ रुपए के फ्री गिफ्ट बांटे हैं. इस मामले में कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी 7 दिन में जवाब मांगा है. फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में ये याचिका दायर की गई है.

1000 करोड़ के गिफ्ट का दावा

एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से सीनियर एडवोकेट संजय पारिख ने सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने ये बात रखी. उन्होंने सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT ) की रिपोर्ट के हवाले से 1000 करोड़ की गिफ्ट का दावा किया है. सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका की सुनवाई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने की.

डोलो दावा को लेकर जस्टिस चंद्रचूड़ ने भी एक वाकया शेयर किया.  हाल ही में वे भी कोरोना संक्रमित हुए थे. इसके बारे में उन्होंने बताया कि जो आप कह रहे हैं, वो मुझे सुनने में अच्छा नहीं लग रहा. ये वही दवाई है, जिसका कोविड के दौरान मैंने खुद इस्तेमाल किया. मुझे भी इसका इस्तेमाल करने के लिए बोला गया था. ये वाकई गम्भीर मसला है.

एसोसिएशन ने कोर्ट से की मांग

सुनवाई के दौरान फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन की ओर से कहा गया कि इस तरह के मामलों में रिश्वत के लिए डॉक्टरों पर तो केस चलता है, पर दवा कंपनियां बच जाती है. एसोसिएशन ने कोर्ट से डॉक्टरों को तोहफे देने वाली दवा कंपनियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित किए जाने की मांग की है. याचिका में ये भी कहा गया है कि फार्मास्यूटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज के लिए यूनिफॉर्म कोड (UCPMP) बनाए जाने की जरूरत है. इसकी जरूरत इसलिए है क्योंकि इसके ना होने के चलते डॉक्टर महंगे गिफ्ट के लालच में मरीजों को महंगी दवाइयां लिखते हैं. इसके चलते मरीजों को महंगी दवाई खरीदनी पड़ती है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए सभी मांगों पर केंद्र सरकार से एक हफ्ते में जवाब मांगा है. इस मामले की अगली सुनवाई 10 दिनों बाद की जाएगी. सुनवाई के दौरान केन्द्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज उपस्थित थे. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से हलफनामा लगभग तैयार है. इसे दाखिल कर दिया जाएगा.

 

Published at:19 Aug 2022 01:15 PM (IST)
Tags:News
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