TNP DESK: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक बार फिर से कच्चे तेल के कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रही है.इंटरनेशनल मार्केट में दाम अचानक से बढ़कर 126 डॉलर डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है जिससे ग्लोबल टेंशन बढ़ गई है.आपको बता दे की कुछ ही दिन पहले अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर लागू हुआ था जिसके कारण हालात काबू में थे लेकिन अब होम्स को लेकर तनाव फिर बढ़ता दिख रहा है.
हुआ यू की Donald Trump ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी को और सख्त करने के पक्ष में हैं. जैसे ही यह खबर सामने आई, तेल बाजार में तेजी आ गई. ट्रंप ने एक इंटरव्यू में साफ कहा कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ कोई ठोस समझौता नहीं करता, तब तक यह ब्लॉकेड जारी रहेगा. उन्होंने ईरान के उस प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया, जिसमें पहले होर्मुज को खोलने और बाद में परमाणु वार्ता आगे बढ़ाने की बात कही गई थी.
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है. पाकिस्तान में हुई पहली बैठक बेनतीजा रही और दूसरी बैठक पर भी अनिश्चितता बनी हुई है. इस बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ा है. ग्लोबल बेंचमार्क Brent Crude की कीमत 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. इससे पहले Russia-Ukraine War की शुरुआत के समय भी तेल कीमतों में इसी तरह का उछाल देखा गया था.
तनाव यहीं तक सीमित नहीं है. खबरों के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई की तैयारी भी कर रहा है, हालांकि इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं. ऐसा होने पर तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए आर्थिक दबाव बढ़ेगा और महंगाई में तेज उछाल देखने को मिल सकता है.