टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : रांची में नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. रांची नगर निगम के मेयर पद के लिए इस बार आधा दर्जन से ज्यादा संभावित उम्मीदवारों के नाम सामने आ चुके हैं. खास बात यह है कि इस बार मेयर का चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद सभी बड़े राजनीतिक दल अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों को उतारने की रणनीति में जुट गए हैं.
इस बार मेयर पद अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित होने के कारण आदिवासी समाज से जुड़े नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. कई नेता अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए जनसंपर्क तेज कर चुके हैं और संगठनात्मक समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं. ST आरक्षण के चलते चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं और आदिवासी समुदाय से जुड़े नेताओं को पहली बार बड़े स्तर पर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का मौका मिला है.
राजनीतिक सरगर्मी का आलम यह है कि सामाजिक संगठनों और स्थानीय स्तर के नेताओं के बीच भी अपने-अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को आगे बढ़ाने की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं. हर कोई इस मौके को भुनाने में लगा है.
भाजपा समर्थित संभावित उम्मीदवारों में अशोक बड़ाइक, रोशनी खलखो, संजय टोप्पो और रवि मुंडा के नाम चर्चा में हैं. एक से ज्यादा दावेदार होने के कारण भाजपा खेमे में अंदरूनी मंथन तेज हो गया है. वहीं कांग्रेस की ओर से रमा खलखो और अजय तिर्की को मजबूत चेहरा माना जा रहा है. सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की तरफ से बीरू तिकीं समेत अन्य नेता भी मेयर पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं.
हालांकि नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि भाजपा, कांग्रेस और झामुमो सहित सभी प्रमुख दल अपने समर्थित उम्मीदवारों के जरिए अपनी ताकत दिखाने की तैयारी में हैं. पार्टी कार्यकर्ताओं को नीचे तक सक्रिय किया जा रहा है ताकि समर्थित प्रत्याशियों को पूरा सहयोग मिले और राजनीतिक पकड़ और मजबूत की जा सके. अब देखना दिलचस्प होगा कि ST आरक्षित इस मेयर पद की रेस में आखिर बाजी किसके हाथ लगती है.
