टीएनपी डेस्क (TNP DESK): साल 2024 में लगने वाला प्रयागराज का महाकुंभ मेला अपने आप में खास रहा. जहां एक से एक आध्यात्मिक साधु संतों के दर्शन लोगों को हुए तो वही मेले से कई लोगों ने सुरखियां बटोरी जिनका पहले कोई भी अस्तित्व नहीं था.आईआईटीएन बाबा यानी अभय सिंह महाकुंभ मेले से चर्चा में आए जो अपने अलग अंदाज़ और आध्यात्मिक व्यक्तित्व को लेकर प्रसिद्ध हो गए.वही एक बार फिर आईआईटीएन बाबा को लेकर एक बड़ी और चौकाने वाली खबर सामने आई, जहां आईआईटीएन बाबा ने शादी कर ली है. 6 अप्रैल को वह अपनी पत्नी संग अपने गांव हरियाणा में दिखाई दिए.
शादी की खबर से हैरान हो गए लोग
अचानक अभय सिंह को पत्नी के साथ देखकर लोग भी हैरान रह गए पूछे जाने पर आईआईटीएन बाबा ने कहा कि 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन ही हिमाचल प्रदेश के महादेव मंदिर में शादी की थी.वही 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज भी कर लिया.अभय सिंह अपनी पत्नी के बारे में बताते हुए कहते है कि उनकी पत्नी अपनी जिंदगी में काफी ज्यादा खुश है और वह लोग दोनों फिलहाल सादगीपूर्ण जीवन जी रहे है. आपको बता दें कि अभय सिंह की पत्नी प्रतिका मूल रूप से कर्नाटक की रहनेवाली है और पेशे से इंजीनियर है.फिलहाल दोनो एक धर्मशाला में रह रहे है और खुशी-खुशी अपना जीवन काट रहे है.
महाकुंभ मेले से वायरल हुए अभय सिंह
आपको बता दें कि आईआईटीएन बाबा इतने ज्यादा देश में मशहूर हो चुके है कि अब उनकी शादी की खबर सुनकर लोग भी हैरान है, यह राज तब खुला जब सोमवार को वह अपने हरियाणा में गांव माता पिता से मिलने पहुंचे हलांकि उनके पहनावे में कोई भी अंतर नहीं आया है. अभय सिंह भगवा वस्त्र में पहुंचे.अभय सिंह की पत्नी ने कहा है कि उनके पति अभय काफी ईमानदार और सरल इंसान है. दोनों की मुलाकात 1 साल पहले हुई थी दोनों ने मिलकर सनातन अध्यात्म पर का काम करने और उसे आगे बढ़ाने का फैसला लिया है. प्रतीका का कहना है कि भविष्य में उनके पति और वह दोनों मिलकर एक सनातन यूनिवर्सिटी बनाने की सोच रहे हैं जहां साधक आध्यत्म गुरु से जुड़े लोग एक मंच पर मिलेंगे.
काफी दिलचस्प है आईआईटीएन बाबा की प्रेम कहानी
एक ऐसा इंसान जिसने अध्यात्म के लिए और अपनी खोज के लिए परिवार तक को छोड़ दिया वह अचानक से कैसे शादी के लिए राजी हो गया. आईआईटीएन बाबा की प्रेम कहानी भी काफी दिलचस्प है.जहां आईआईपीएन बाबा ने जैसे ही प्रितिका को देखा उनको पहली नजर में ही वह पसंद आ गई क्योंकि उसके अंदर भी उनकी तरह ही कुछ जानने और अध्यात्म को लेकर जिज्ञासा थी.