नई दिल्ली(NEWDELHI): आतंकवाद का नया चेहरा अब सफेद कोट के पीछे छिपा दिखा है. इस बार टोपी नहीं बल्कि व्हाइट कॉलर जिहाद का खुलासा हुआ. शिक्षित पेशेवरों, खासकर डॉक्टर ने एक घिनौनी साजिश रची. जिससे देश दहलने वाला था. आतंकी पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) के इशारों पर भारत को दहलाने का सपना देख रहा था. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'जीरो टॉलरेंस' नीति और केंद्र सरकार की एजेंसियों की सतर्कता ने एक बार फिर देश को खौफनाक तबाही से बचा लिया.
PM मोदी ने बिहार चुनाव के दौरान ही आतंकी को दो टूक जवाब दिया था की एक भी गोली चली या साजिश हुई तो अंजाम बुरा होगा. इस कार्रवाई और बयान के बीच दिल्ली ब्लास्ट की ने केंद्र की एजेंसी को और चौकन्ना कर दिया है. साथ ही गृह मंत्री ने हर पहलु पर जांच का आदेश दिया है.साथ ही पूरी रिपोर्ट मांगी है.अब तक दिल्ली ब्लास्ट की तस्वीर साफ़ नहीं हुई है कि इसके पीछे वजह क्या है. CNG या कोई बड़ी साजिश का हिस्सा है.
यह ब्लास्ट उस समय हुआ है जब एजेंसी ने आतंकियों का 2900 किलो विस्फोटक जब्त कर लिया. घटना से 24 घंटे पहले ही बड़ी कार्रवाई की गई है, हालांकि यह बात फिर दोहरा दे कि दिल्ली ब्लास्ट की साजिश जरूर थी लेकिन इस कार ब्लास्ट में अभी कही भी बम ब्लास्ट की पुष्टि नहीं है. खुद गृह मंत्री अमित शाह घटना स्थल पहुंच कर जायजा लिया है और पूरे मामले की रिपोर्ट प्रधानमंत्री मोदी को सौंपा है.
अब बात फरीदाबाद की घटना की कर लेते है. दिल्ली एनसीआर में बैठ कर बड़ी साजिश रची गयी और दिल्ली के दिल को चीरने वाली थी. लेकिन अब समय बदल चुका है आतंकियों को उनकी ही भाषा में जवाब मिल रहा है.एजेंसी आतंकियों को खोज कर जहनुम में पहुंचाने का काम कर रही है.
यह 'व्हाइट कॉलर टेरर इकोसिस्टम' कोई साधारण साजिश नहीं थी.जम्मू-कश्मीर पुलिस, हरियाणा पुलिस, उत्तर प्रदेश पुलिस और NIA की 15 दिनों की संयुक्त कार्रवाई में आठ गिरफ्तारियां हुईं, जिनमें तीन डॉक्टर—डॉ. मुजम्मिल गनाई (फरीदाबाद अल-फलाह अस्पताल), डॉ. आदिल अहमद राठर (अनंतनाग GMC) और डॉ. शाहीन (लखनऊ)—शामिल थे. एक मस्जिद इमाम इरफान अहमद और अन्य रैडिकल प्रोफेशनल्स भी फंसे.कुल 2,900 किलो विस्फोटक सामग्री—जिसमें 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट, पोटैशियम नाइट्रेट, सल्फर, 20 टाइमर, AK-47 राइफलें, ऑटोमैटिक पिस्टलें, 84 कारतूस और केमिकल्स—बरामद हुए.फरीदाबाद के धौज इलाके में डॉ. मुजम्मिल के किराए के फ्लैट से 12 सूटकेसों में पैक ये सामान मिला, जो दिल्ली-एनसीआर में एक साथ कई धमाकों के लिए तैयार था. इनका टारगेट लाल किला, रेड फोर्ट मेट्रो या अन्य संवेदनशील जगहें—जो 26/11 मुंबई हमलों से भी बड़ा खूनी खेल रच सकता था.
साजिश करने वाले ये 'शिक्षित' आतंकी एनक्रिप्टेड ऐप्स जैसे टेलीग्राम पर पाकिस्तानी हैंडलर्स से जुड़े थे.सोशल मीडिया, एनजीओ और अकादमिक नेटवर्क के जरिए फंड जुटाते—सोशल सर्विस के नाम पर युवाओं को कट्टर बनाना,IED बनाने का सामान इकट्ठा करना, हथियार तस्करी, श्रीनगर में JeM के पोस्टर चिपकाने से लेकर सहारनपुर तक फैला ये नेटवर्क उत्तर प्रदेश, हरियाणा और कश्मीर को जोड़ता था.
डॉ. आदिल को CCTV फुटेज से पकड़ा गया, जिसकी पूछताछ से फरीदाबाद का ठिकाना खुला.डॉ. शाहीन की स्विफ्ट डिजायर कार से AK-47 निकला, जो लखनऊ से श्रीनगर लाई जा रही थी.जांच में फाइनेंशियल ट्रेल्स भी उजागर हो रही हैं—सोशल चैरिटी के बहाने विदेशी फंडिंग.एक तीसरा डॉक्टर अभी फरार है, जिसकी तलाश तेज कर दी है.
यह साजिश का खुलासा मोदी सरकार की साफ नीति का आईना है.2014 से चली आ रही 'ऑपरेशन ऑल आउट' और 'जीरो टॉलरेंस' पॉलिसी ने कश्मीर में आतंकी घटनाओं को 70% तक कम किया.
NIA, NSG और राज्य पुलिसों का इंटीग्रेटेड नेटवर्क 24/7 इंटेलिजेंस पर काम करता है.पीएम मोदी ने खुद कहा है, "आतंकवाद के खिलाफ कोई ढील नहीं—हम सर्जिकल स्ट्राइक्स से लेकर बालाकोट तक दुश्मनों को घर में घुसकर मारेंगे.गुजरात ATS ने भी इसी हफ्ते हैदराबाद में एक डॉक्टर को रिसिन पॉइजन प्लॉट के लिए पकड़ा.ये गिरफ्तारियां साबित करती हैं कि मोदी की मजबूत लीडरशिप ने 'व्हाइट कॉलर' खतरे को भी कुचल दिया.पहले जहां साजिशें पनप जातीं, अब प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक्स से रोकी जा रही हैं.
अब सवाल है कि आखिर ये 'फरिश्ते' कैसे शैतान बन जाते हैं? रैडिकलाइजेशन की जड़ें सोशल मीडिया और विदेशी प्रॉक्सी में हैं.सरकार को अब और सख्ती बरतनी होगी—एजुकेशन सिस्टम में काउंटर-रैडिकलाइजेशन प्रोग्राम, फाइनेंशियल मॉनिटरिंग और इंटरनेशनल कोऑपरेशन.
