टीएनपी डेस्क(TNP DESK):हमारे देश में शादी सामाजिक बंधन के साथ कानूनी बंधन भी माना जाता है जहां पति-पत्नी अगर बिना वजह एक दूसरे को छोड़ते है या रिश्ते को तोड़ते है तो यह गैर कानून है.आजकल के दौर में पति-पत्नी के रिश्ते में भी विश्वास की डोर कमजोर हो चुकी है, जहां पति पत्नी एक दूसरे को ही धोखा दे रहे है. वहीं कई बार ऐसा होता है कि पति घर से बाहर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर रखता है और उसे अपनी पत्नी की हर बात गलत लगती है. एक दिन ऐसा आता है जब वह अपनी पत्नी को घर से बाहर निकाल देता है ऐसे में उस पत्नी को समझ में नहीं आता है कि वह जाए तो कहां जाए.
किसी भी महिला के लिए यह स्थिति काफी भयावह है
अब मैं कहां जाऊंगा अगर मायके गई तो वह लोग भी मुझे नहीं रखेंगे...यह एक ऐसी गंभीर समस्या है जब महिला को पति घर से निकाल देता है तो उसे समझ में नहीं आता है कि वह कहां जाए अगर मायके जाएगी तो मायके वाले भी रखने को तैयार नहीं होते है.क्योंकि हमारे समाज में शादीशुदा बेटियां के ससुराल से निकाले जाने के बाद मायके में रखना बेइज्जती माना जाता है.इस वजह से बेटियां घरेलु हिंसा को सहती रहती है और पति के घर को छोड़कर नहीं जाती है लेकिन जब पति घर से निकल दे तो पत्नी क्या करें.ऐसे में आज हम आपको बताने वाले है कि अगर आपका पति अचानक आपको घर से बाहर निकाल दे तो तो आप कैसे क़ानूनी रूप से अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते है और मदद ले सकती है.
ग्रामीण इलाकों में आज भी अन्याय को सहती है महिला
वैसे तो आजकल ज्यादा पढ़ी लिखी महिलाएं है इस वजह से उनके साथ घरेलू हिंसा कम होती है अगर होती भी है तो वह सख्त कदम उठाती है.लेकिन आज भी ग्रामीण इलाक़ों में ऐसी महिलाएँ हैं जो पढ़ी लिखी होने के बावजूद सामाजिक बंधन को तोड़ नहीं पाती है और अन्याय को सहती जाती है.यदि आपके पति ने भी आपके घर से बाहर निकल दिया है तो आपको अपने कानूनी अधिकारों के बारे में जरूर पता होना चाहिए ताकि आप कोर्ट की मदद लें सकें.क्योंकि बिना वजह आपको घर से नहीं निकाला जा सकता.
कोई भी पति बिना वजह पत्नी को घर से नहीं निकाल सकता है बाहर
आपको बता दें कि हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के अनुसार यदि आपकी शादी किसी से हुई है तो आप बिना वजह उसको नहीं छोड़ सकते, पत्नी को लेकर अधिकार भी सुरक्षित रखें गए है,जहां कोई भी पति अपनी पत्नी को ये कहकर नहीं निकाल सकता है कि वह घर उसका घर है या माता-पिता का है, क्योंकि जब किसी भी महिला की शादी होती है तो उसके पति के साथ उसे रहने का अधिकार होता है चाहे वह किराये का घर हो, माता पिता का घर हो या उसके पति का घर हो, वहां से उसे कोई नहीं निकाल सकता.फिर भी कोई अगर ऐसा करता है तो या कानूनी रूप से सरासर गलत है ऐसे में जानते है पत्नी के कानूनी अधिकार क्या है.
हर शादीशुदा महिला को अपने वैवाहिक घर में रहने का अधिकार
आपको बताएं कि डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट, 2005 की धारा 17 के अनुसार हर शादीशुदा महिला को अपने वैवाहिक घर में रहने का अधिकार होता है. इसका मतलब है आपको अपने शेयर्ड हाउसहोल्ड से निकाला नहीं जा सकता.यदि फिर भी आपके घर वालों ने या पति ने घर से बाहर निकाल दिया है तो आपके लिए उसके बाद के 24 घंटे काफी अहम है, इस दौरान में आपका द्वारा उठाया गया हर कदम आपके केस को मजबूत या कमजोर कर सकता है ऐसे में आपको सबसे पहला कदम क्या उठाना चाहिए.
सबसे पहले खुद को सुरक्षित रखें
यदि आपके पति ने या ससुराल वालों ने घर से बाहर कर दिया है तो आपको सबसे पहले ऐसे सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए जहां आपकी जान को कोई भी खतरा ना हो.आप चाहे तो अपने माता-पिता भाई-बहन कोई रिश्तेदार या विश्वासी दोस्त के घर आश्रय ले सकते है.ताकि आपकी जान को कोई खतरा ना हो और आप सुरक्षित रहें.
किसी को अपने ऊपर हुए अत्याचार के बारे में बताएं
जो भी आपके साथ हुआ है उसको फ़ोन करके जरूर अपने सबसे भरोसेमंद लोग जैसे माता-पिता भाई-बहन अच्छे दोस्तों को बताये ताकी आपको इमोशनल समर्थन मिल सके और आप अकेले सब कुछ ना झेले. आपको मानसिक तनाव हो सकता है. इसके साथ ही आपको गवाह भी मिल जाएगा.
सबूत रखे सुरक्षित
यदि आपके घर से निकलने से पहले मारपिट की गई है तो सबसे पहले चोटों की फोटो, टूटे हुए सामान की तस्वीरें, व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग, ऑडियो या वीडियो और अगर इलाज कराया है तो मेडिकल रिपोर्ट.ये सब आगे कोर्ट और पुलिस में बहुत काम आएंगे.इन्हें सभी साबूतों को ईकट्ठा करके रखें. यह आपको आगे काम आएगा.अगर संभव हो तो किस दिन, किस समय, किसने क्या कहा या किया – सब कुछ एक डायरी या कागज़ पर लिख लें. यह आपकी याददाश्त ताज़ा रखेगा और बाद में शिकायत या केस दर्ज करते समय बहुत मदद करेगा.
मैजिस्ट्रेट के सामने शिकायत दर्ज करा सकती है
अगर पति या ससुराल द्वारा आपको घर से निकाल दिया गया है या आप पर हिंसा हो रही है, तो डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट, 2005 की धारा 12 के तहत आप मैजिस्ट्रेट के सामने शिकायत दर्ज करा सकती है. आप प्रशासन से सुरक्षा आदेश ले सकते है.प्रोटेक्शन ऑर्डर (धारा 18) में कोर्ट पति या किसी भी हिंसक व्यक्ति को आदेश दे सकती है कि वह आपको धमकाए, डराए या शारीरिक नुकसान न पहुँचाए.इसका मतलब है कि आपके खिलाफ कोई हिंसक व्यवहार नहीं किया जा सकता.
रेसिडेंस ऑर्डर (धारा 19) करेगा मदद
वही उसके साथ ही रेसिडेंस ऑर्डर (धारा 19) भी आपकी अधिकार की सुरक्षा करेगा जहां कोर्ट यह आदेश दे सकती है कि आपको घर में वापस आने की अनुमति हो. चाहे घर पति का हो, ससुराल का हो या किराए का, बिना कोर्ट के आदेश आपको बाहर नहीं निकाला जा सकता.
मेंटेनेंस की मांग कर सकती है
मेंटेनेंस (धारा 20) आप अपने रोज़मर्रा के खर्च, भोजन, कपड़े और बच्चों के खर्च के लिए कोर्ट से मेंटेनेंस की मांग कर सकती है.कोर्ट पति को यह खर्च देने का आदेश दे सकती है.मुआवज़ा (धारा 22): अगर आप पर किसी तरह की शारीरिक या मानसिक हिंसा का प्रभाव पड़ा है, तो कोर्ट मुआवज़ा भी निर्धारित कर सकती है.
